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बर्दाखान जीआईसी को शिक्षक दे दो हुजूर, किया प्रदर्शन

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शिक्षकों की कमी से जूझ रहे जीआईसी बर्दाखान में प्रदर्शन करते अभिभावक। - फोटो : CHAMPAWAT
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बर्दाखान राजकीय इंटर कॉलेज के 160 छात्र-छात्राओं का भविष्य शिक्षकों की कमी से मझधार में है। लंबे समय से रिक्त छह प्रवक्ताओं और एक एलटी शिक्षक के पदों पर तैनाती नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने पीटीए के अध्यक्ष भवान कालाकोटी और कोषाध्यक्ष मोहन सिंह अधिकारी के नेतृत्व में बर्दाखान जीआईसी परिसर में प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि अगर छात्रों के भविष्य के साथ ऐसे ही खिलवाड़ जारी रहा तो वे जिला मुख्यालय में प्रदर्शन करेंगे।
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ग्रामीणों का कहना है कि बर्दाखान जीआईसी में अंग्रेजी, गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता तथा अंग्रेजी के एलटी शिक्षक का पद लंबे समय से रिक्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी और दूरस्थ होने के चलते इसे दुर्गम श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए था लेकिन इसे सुगम श्रेणी का दर्जा देने से व्यवस्थाएं और भी बुरी हो रही हैं।
प्रदर्शन करने वालों में माधवानंद जोशी, सुरेश चंद्र, दीपक पंत, खड़क सिंह, दीपा देवी, कमला, सोनी देवी, प्रिया पंत, मोहनी देवी, राजेश्वरी जोशी, मंजू देवी, गौरव कालाकोटी, गोविंद सिंह आदि शामिल थे। इधर सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि शिक्षकों की तैनाती के लिए निदेशालय से पत्राचार चल रहा है।
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आठवीं बार पीटीए अध्यक्ष बने भवान
चंपावत। भवान कालाकोटी बर्दाखान जीआईसी अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के लगातार आठवीं बार अध्यक्ष चुने गए। प्रधानाचार्य प्रकाश चंद्र जोशी की अध्यक्षता और दुर्गेश चंद्र जोशी के संचालन में चुनाव की प्रक्रिया संपन्न हुई। शिक्षिका नीतिका रावत ने कॉलेज का लेखाजोखा रखा। पीटीए अध्यक्ष ने कॉलेज में शिक्षकों की कमी से लेकर अन्य समस्याओं के समाधान के लिए चंपावत से लेकर देहरादून तक आवाज उठाने की बात कही। अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षकों की कमी के बावजूद कॉलेज के स्टाफ की मेहनत से बोर्ड परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है।
जीआईसी के साथ हो रहा दोयम दर्जे का बर्ताव: मोहन
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह का कहना है कि बर्दाखान जीआईसी के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया जा रहा है। इस दूरस्थ स्कूल के छात्र शिक्षक न होने से लोहाघाट, बाराकोट और दूसरी जगह पढ़ाई करने को मजबूर हो रहे हैं।
पड़ रही है जेब पर मार: शांति
शांति देवी का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की तैनाती न होन से उन पर दोहरी मार पड़ रही है। यहां पढ़ाई नहीं होने के चलते उन्हें अपने बच्चों को मजबूरन दूसरे स्कूलों में भेजना पड़ रहा है। इस कारण उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
जिम्मेदारी से भाग रहे हैं अफसर: ममता
ममता देवी का कहना है कि बाराकोट जीआईसी की व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए न अधिकारी प्रयास कर रहे हैं और न ही नुमाइंदे। शिक्षकों की कमी को भरने के प्रयास करने का जवाब देकर उन्हें टरकाया जा रहा है।
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