आमतौर पर बाजार में घी 400 से 500 रुपये किलो की दर से बिकता है लेकिन पहाड़ी नस्ल की बद्री गाय का घी चार हजार रुपये किलो ऑनलाइन बिक रहा है।
पहाड़ी नस्ल की गाय के संरक्षण के बनाए गए नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र में बद्री गाय को बचाने की मुहिम रंग ला रही है। हेथा कंपनी बद्री गाय के दूध को 41 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद कर इसका घी बनवा रही है जो ऑनलाइन चार हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। वर्तमान में यहां 300 पशुधन हैं जिसमें 140 बद्री गाय और उनके बछड़े हैं।
पशु प्रजनन केंद्र में प्रतिदिन बद्री गायों से 125 लीटर दूध प्राप्त होता है। पूर्व में यह दूध दुग्ध संघ को 25 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दिया जाता था। बाद में पशु प्रजनन केंद्र ने बद्री गाय के दूध की लैब में सैंपलिंग कराई। लैब में बद्री गाय के दूध में ए-2 प्रोटीन के अलावा अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता पाई गई।
इसकी गुणवत्ता के आधार पर पशुपालन विभाग ने दूध को खरीदने के लिए निविदा आमंत्रित की जिसके बाद पशुपालन विभाग ने दूध का पेटेंट कराया। निविदा के बाद गाजियाबाद की हेथा कंपनी ने दूध के 41 रुपये प्रति लीटर की दर से दाम दिए। नरियालगांव की स्थानीय महिलाएं हेथा कंपनी के लिए इस दूध से पारंपरिक तरीके से घी तैयार कर दे रही हैं। इससे उनको रोजगार भी मिल रहा है।
यह घी हेथा हिमालयन पहाड़ी बद्री गाय बिलोना घी के नाम से ऑनलाइन बिक रहा है। बद्री गाय के कम दूध देने के कारण पहाड़ में लोगों ने इन्हें पालना छोड़ दिया था। पशुपालन विभाग की इस पहल से अब लोग फिर से बद्री गाय पालने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
गाजियाबाद की हेथा कंपनी बद्री गाय के दूध से जैविक घी तैयार कर रही है जो अमेजन सहित कई अन्य शॉपिंग कंपनियों में ऑनलाइन बिक रहा है। आधा किलोग्राम की कीमत 2500 रुपये है। डॉ. बीएस जंगपांगी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।
दस महिलाओं को मिला रोजगार
चंपावत। हेथा कंपनी की ओर से बद्री गाय के दूध से घी तैयार करने के लिए 10 स्थानीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। नरियालगांव में लगाए गए प्लांट में घी तैयार करने के कार्य में लगी महिलाओं को दैनिक पारिश्रमिक दिया जाता है। कंपनी की ओर से प्रत्येक महिला को 7000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र में मौजूद बद्री गायें।- फोटो : CHAMPAWAT