नेपाल सीमा से लगे गावों में गौरा महोत्सव की धूम मची है। रामायण और महाभारत कथाओं का गीतों के जरिए उल्लेख किया जा रहा है। लोहाघाट के अलावा चमदेवल के जिंडी, सुनकुरी, लुपड़ा, बिशुंग, फोर्ती, नौमाना, सिंगदा और खेतीखान में गौरा गायन किया जा रहा है।
लोहाघाट में लोनिवि कालौनी के समीप केशव कुटीर में डॉ. सुमन पांडेय के नेतृत्व में महिलाओं ने मां गौरा को विदाई दी। महिलाओं ने झोड़ों का गायन किया। इस मौके पर इंदिरा बिष्ट, आशा बिष्ट, डॉ. अर्चना त्रिपाठी, दीपा सनवाल, अलका, भावना खर्कवाल, रेनु जोशी, सीमा, कृतिका, श्वेता, अनीता जोशी, शांति भंडारी, सीता लुंठी, रेखा आदि महिलाएं मौजूद थीं।
चमदेवल के जिंडी गांव में निवर्तमान ग्राम प्रधान मदन कलौनी की अध्यक्षता और कल्याण चंद के संचालन में हुए महोत्सव में युवाओं और बुजुर्गों ने गौरा, धूमारी और चाली का गायन किया। महिलाओं ने गौरा देवी की मूर्ति के चारों ओर मांगलिक गीत गाए।
वहां गुमान राम, गोपाल राम, प्रहलाद राम आदि मौजूद रहे। सुई चौबे गांव में अमिता चौबे, पूजा चौबे, सुनीता, गंगा देवी, पुष्पा देवी, कलावती चौबे आदि महिलाओं ने गौरा देवी महोत्सव धूमधाम से मनाया।
लोहाघाट पीडब्लूडी कालोनी में मां गौरा को मांगलिक गीतों के साथ विदाई देतीं महिलाएं।- फोटो : LOHAGHAT