गैस एजेंसी प्रबंधक दयाल सिंह रावत के आकस्मिक निधन के बाद परिवार ने काम के बढ़ते दबाव को बड़ा कारण बताया है। पत्नी किरन के अनुसार, रावत पिछले कुछ समय से गैस संकट को लेकर मानसिक तनाव में थे और लगातार ट्रांसफर की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।
किरन ने रोते-बिलखते बताया कि रावत अक्सर कार्यालय से लौटने के बाद घर पर काम के दबाव की चर्चा करते थे। गैस सिलेंडर की किल्लत और उपभोक्ताओं के बढ़ते दबाव के कारण वह काफी परेशान रहने लगे थे। उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों से ट्रांसफर के लिए संपर्क किया, लेकिन किसी ने उनका फोन नहीं उठाया।
बताया कि सोमवार शाम घर पहुंचने के बाद रावत की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें उल्टी हुई। स्थिति बिगड़ने पर परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। रावत के निधन से गैस एजेंसी प्रबंधकों में शोक की लहर है। कुमाऊं क्षेत्र से बड़ी संख्या में प्रबंधक उनके आवास पर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। इसके चलते छह अप्रैल को पूरे कुमाऊं में गैस सिलेंडर वितरण भी प्रभावित रहा। सहकर्मियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से रावत पर काम का दबाव साफ नजर आ रहा था और उनकी चेहरे की मुस्कान भी धीरे-धीरे गायब होती जा रही थी।