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आबादी में आगे मगर परिवार नियोजन में पीछे हैं पुरुष

Sun, 10 Jul 2016 10:18 PM IST
चंद्रशेखर जोशी, चंपावत
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जनसंख्या - फोटो : अमर उजाला
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पुरुष प्रधान समाज में जनसंख्या स्थिरीकरण में पुरुषों की सक्रियता नहीं हैं। जिले में पुरुषों की आबादी ज्यादा है, मगर परिवार नियोजन के मामले में उनकी भागीदारी बेहद कम हैं। नसबंदी में पुरुषों की भूमिका नगण्य है। पिछले साल हुई 647 नसबंदी में मात्र एक नसबंदी पुरुष की हुई। जबकि बीते पांच वर्षों में पुरुषों का आंकड़ा बस 75 का है।
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बता दें कि 11 जुलाई से 24 जुलाई तक विश्व जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा मनाया जाएगा। जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन सबसे कारगर हथियार है, मगर इसमें पुरुषों का रोल नहीं है। 2011 की जनगणना के मुताबिक चंपावत जिले की कुल 259648 की आबादी में पुरुषों की संख्या  131125 है। लेकिन परिवार नियोजन में उनका हिस्सा दो प्रतिशत से भी कम है। 1 अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2016 तक के पांच वर्षों में कुल 3852 नसबंदी हुई। जिसमें पुरुषों का हिस्सा महज 75 (1.94 प्रतिशत) रहा। शेष 3777 नसबंदी महिलाओं की हुई।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पुरुषों की नसबंदी  महिलाओं की अपेक्षा अधिक सरल और सुरक्षित है। पुरुषों की नसबंदी के लिए चीरे-टांके की जरूरत नहीं होती। इसे छह मिनट से भी कम समय में किया जाता है और न ही बेहोश करने की जरूरत होती है। सावधानी के नाम पर एक सप्ताह तक भारी काम न करते हुए शारीरिक आराम जरूरी है। जबकि महिलाओं की नसबंदी में न केवल अधिक समय लगता है, बल्कि उन्हें चीरा लगाने की जरूरत भी पड़ती है।
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 वर्ष       महिला नसबंदी     पुरुष नसबंदी
2011-12        963             33
2012-13        738             21
2013-14        727             15
2014-15        703             05
2015-16        646             01
कुल               3777            75


पुरुषों को मिलती है अधिक प्रोत्साहन राशि
परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए शासन ने भी पहल की है। पुरुष नसबंदी में प्रोत्साहन राशि महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा मिलती है।  पुरुष नसबंदी में 2000 रुपये मिलते हैं। जबकि महिलाओं को 1400 रुपये दिए जाते हैं। पुरुषों की नसबंदी को प्रोत्साहित करने के लिए आशा वर्कर्स को भी 500 रुपये अतिरिक्त रकम यानी कुल 1100 रुपये दिए जाते हैं। वहीं महिलाओं को दूसरे प्रसव के सात दिन के भीतर नसबंदी कराने पर 2200 रुपये दिए जाते  हैं। 

परिवार नियोजन के लिए होने वाली नसबंदी में पुरुषों की भूमिका न्यूनम स्तर पर है। जबकि इसके लिए उन्हें प्रेरित करने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं। लेकिन मानसिकता में बदलाव नहीं आने से पहाड़ में ये स्थिति है। अलबत्ता विभाग नए सिरे से पुरुषों को जागरूक करने का अभियान चलाएगा।
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डॉ. आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।
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