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22 बरसों का सफर, अभी भी कई सुविधाएं नहीं मयस्सर!

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चंपावत जिला मुख्यालय में स्थित चंद शासकों की ओर से निर्मित ऐतिहासिक राजबुंगा किले का प्रवेश द्व? - फोटो : CHAMPAWAT
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एकीकृत उत्तर प्रदेश में 15 सितंबर 1997 को अस्तित्व में आए चंपावत जिले ने 22 बरसों का लंबा सफर तय कर लिया है लेकिन आज भी चंपावत जिले को कई ऐसी सुविधाएं मयस्सर नहीं हो पाई हैं जो नागरिकों के लिए बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण हैं।
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अलग उत्तराखंड राज्य बनने के 19 वर्षों बाद भी जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज, बेस अस्पताल, बाईपास, सीवर लाइन, स्टेडियम, ऑडिटोरियम, जेल निर्माण, एआरटीओ कार्यालय, ट्रंचिंग ग्राउंड, तहसील भवन, औद्योगिक आस्थानों, सड़कों सहित कई अन्य जरूरी ढांचागत सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है।
इसके अलावा ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन महत्व के स्थलों की भरमार होने के बाद भी पर्यटन गतिविधियां व्यवसाय के रूप में तब्दील नहीं हो पाई हैं। कुल मिलाकर अतीत में चंद शासकों की राजधानी रही चंपानगरी को वर्तमान में भी समुचित विकास की दरकार है।
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फोटो 14 सीपीटी 11 पी से 13 पी तक।
चंपावत की 22 सालों की 22 उपलब्धियां
1.कलक्ट्रेट और विकास भवन का निर्माण।
2.पूल्ड आवास का निर्माण।
3.जिला न्यायालय भवन का निर्माण।
4.एसपी कार्यालय और पुलिस लाइन का निर्माण।
5.जिला अस्पताल का निर्माण
6.आईटीआई भवन का निर्माण।
7.सर्किट हाउस का निर्माण।
8.जिला उद्योग केंद्र निर्माण।
9.कोषागार भवन का निर्माण।
10.राजकीय पालीटेक्रिक भवन का निर्माण।
11.नर्सिंग कालेज का निर्माण।
12.आलवेदर रोड का निर्माण।
13.रोडवेज बस स्टेशन का निर्माण।
14.चंपावत में शूटिंग रेंज की स्थापना।
15.सीमांत मंच उपतहसील का गठन।
16.गौड़ी-किमतोली मोटर मार्ग निर्माण।
17.220 एकड़ में चाय बागान विकसित।
18.एसडीएम सदर की नियुक्ति।
19.चंपावत नगर पालिका का गठन।
20.बनबसा नगर पंचायत का गठन।
21.बाराकोट तहसील का गठन।
22.जिला पंचायत भवन का निर्माण।
चंपावत की 22 महत्वपूर्ण मांगें जो अभी पूरी होनी हैं
1.मेडिकल कॉलेज की स्थापना।
2.बेस अस्पताल का निर्माण।
3.ट्रंचिंग ग्राउंड का निर्माण।
4.जिला मुख्यालय में मास्टर प्लान लागू करना।
5.जिला मुख्यालय में सीवर लाइन का निर्माण।
6.खेल स्टेडियम निर्माण।
7.जिला जेल का निर्माण।
8.एआरटीओ कार्यालय की स्थापना।
9.चंपावत-धामीसौन-खेतीखान सडक़।
10.चंपावत-दुधपोखरा-खोकिया सडक़।
11.मौनपोखरी-नीड़ मोटर मार्ग।
12.कोट अमोड़ी-लेक अमोड़ी-सैंदर्का सडक़।
13.चंपावत को पर्यटन सिटी बनाने।
14.तहसील भवन का निर्माण।
15.ऐतिहासिक राजबुंगा किले को संग्रहालय का रूप।
16.चंपावत हिंगलादेवी के बीच रोपवे निर्माण।
17.चंपावत क्रांतेश्वर के बीच रोपवे निर्माण।
18.क्वैराला पंपिंग पेयजल योजना।
19.मुख्यालय में आडियोटोरियम का निर्माण।
20.बहुउद्देशीय पंचेश्वर बांध परियोजना का निर्माण।
21.कूर्म सरोवर और डिप्टेश्वर झील।
22.गौड़ी और सप्तेश्वर पावर हाउस का पुनर्निर्माण।
बाइस साल का हुआ ललना, अभी भी सीख ही रहा है चलना
चंपावत। जिला विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष बसंत सिंह तड़ागी कहते हैं चंपावत जिला 22 साल का हुआ ललना, अभी भी सीख ही रहा है चलना की कहावत चरितार्थ कर रहा है। जिला बनने से स्थानीय लोगों को जहां प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संवाद का मौका मिला है। वहीं अभी भी कई बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता है।
चंपावत जिले के विकास के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। विभिन्न अधूरी योजनाएं जल्द ही पूरी होंगी और प्रयास किया जा रहा है जिले को प्रदेश भर में सर्वोत्तम जिला बनाया जाए। कैलाश गहतोड़ी, विधायक।
बुजुर्ग आंदोलनकारियों को सम्मानित करेगी समिति
चंपावत। जिला विकास एवं संघर्ष समिति की ओर से जिले के स्थापना दिवस पर बुजुर्ग जिला बनाओ आंदोलनकारियों को सम्मानित किया जाएगा। संघर्ष समिति के अध्यक्ष बसंत तड़ागी ने बताया कि इस दौरान बुजुर्ग आंदोलनकारियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया जाएगा।
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