पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। चंपावत की आध्यात्मिक पहचान मां पूर्णागिरि धाम में डिजिटल भुगतान की प्रशासनिक कवायद पूरा होना वर्ष 2024 के मेले में आसान नहीं है। ऑनलाइन सिस्टम तो दूर धाम का अधिकांश क्षेत्र भी अभी मोबाइल सेवा से नहीं जुड़ पाया है। विभिन्न राज्यों से आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए मोबाइल फोन पर बात करना तक मुश्किल हो जाता है।
प्रशासन कर रहा कवायद लेकिन 90 प्रतिशत क्षेत्र में मोबाइल सेवा नहीं
अगले एक वर्ष में पूर्णागिरि का मेला सालभर का हो जाएगा। जिला प्रशासन ने इस बार मेला क्षेत्र में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए क्यूआर कोड सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं लेकिन इस फैसले का क्रियान्वयन आसान नहीं है। पूर्णागिरि मार्ग पर थ्रीजी सेवा तो दूर, ऊचौलीगोठ से मुख्य मंदिर तक 17 किमी क्षेत्र में 90 प्रतिशत हिस्से में संचार सेवाएं नहीं है। ऐसे में पूर्णागिरि क्षेत्र के पुजारियों और कारोबारियों का कहना है कि भुगतान का ऑनलाइन सिस्टम फिलहाल यहां संभव नहीं है। संवाद
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पूर्णागिरि क्षेत्र में दो (पूर्णागिरि कक्ष संख्या दो और उपराकोट कक्ष संख्या दो) मोाबाइल टावर लगाने के लिए वन अनापत्ति मिल चुकी है। अगले छह माह में टावर लग जाएंगे। उसके बाद पूर्णागिरि धाम में मोबाइल नेटवर्क सुचारु हो जाएगा। - विजय बहादुर, दूरसंचार अभियंता, बीएसएनएल चंपावत।
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पूर्णागिरि धाम में डिजिटल पेमेंट के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए जिलाधिकारी ने टावर ऑन व्हील लगाने के लिए जिला दूरसंचार अधिकारी को निर्देश दिए हैं। इससे व्यापारिक लेनदेन में पारदर्शिता आएगी। - आकाश जोशी, एसडीएम, चंपावत।
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पूर्णागिरि धाम में मोबाइल नेटवर्क अधिकतर जगह नहीं है। ऐसे में मोबाइल टावर लगाए बगैर ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम तो दूर मोबाइल फोन पर बात करना भी संभव नहीं है। मोबाइल कंपनियों से समिति कई बार जल्द टावर लगाने की मांग कर चुकी है। - पंडित किशन तिवारी, अध्यक्ष, पूर्णागिरि मंदिर समिति।