चंपावत। कुदरती खूबसूरती और ताल के चलते पर्यटन का पर्याय बने श्यामलाताल को जल्द ही अब नई पहचान मिलेगी। एक सप्ताह बाद यहां मिनी फूड पार्क बनकर तैयार हो जाएगा। यह पार्क यहां के कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसानों की आय को दोगुना करने में मददगार बनेगा। कृषि विभाग से बने इस फूड पार्क का संचालन स्थानीय स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) करेंगे।
श्यामलाताल क्षेत्र में गडेरी, गेहूं, अदरक, तेजपात की खेती बहुतायत में होती है। मौनपालन भी बेहतर है। मैदानी क्षेत्र टनकपुर से सिर्फ 30 किमी दूर होने के बावजूद यहां के किसान उपज मूल्य के लिए तरसते थे। अब इसकी भरपाई बीएडीपी से दस लाख रुपये में निर्मित यह फूड पार्क करेगा। इसका 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बस एक सप्ताह के भीतर इसे औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा। मौनपालन के लिए मशहूर श्यामलाताल में इस पार्क में मशीन से छत्तों का शहद भी निकाला जाएगा। तेल मिल, आटा चक्की, धान, मसाला मशीन, लेबलिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, मापन मशीन लगाई जाएगी। ग्रामीणों के कृषि उत्पादों को पीसने के साथ ही एसएचजी भी स्थानीय स्तर पर यहां के उत्पादों की बिक्री करेंगे।
श्यामलाताल में मिनी फूड पार्क का काम तकरीबन पूरा हो गया है। एक सप्ताह में यह पार्क विभाग को हस्तांतरित हो जाएगा। इस पार्क में स्थानीय स्तर पर होने वाले विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए लेवलिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, मापन मशीन लगा दी गई है। इससे किसानों को उत्पाद के अधिक दाम मिल सकेंगे।
- राजेंद्र उप्रेती,
मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
दुग्ध प्रोत्साहन कार्यक्रम से भी जुड़ा
चंपावत। श्यामलाताल के किसानों को दुग्ध उत्पादन के प्रोत्साहन से भी जोड़ दिया गया है। दुग्ध संघ प्रबंधक राजेश मेहता ने बताया कि इसके लिए यहां 10.45 लाख रुपये का दुग्ध प्रोत्साहन कार्यक्रम से समग्र योजना बनाई गई थी। इससे प्रशिक्षण के अलावा चारा विकास, दुग्ध समितियों में सौर ऊर्जा, डीपीएमसीयू, वेइंग मशीन सहित मिल्क एनालाइजर लगाया गया है।