चम्पावत। जिला सत्र न्यायाधीश अनुज संगल ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत टाइगर की हड्डियों के साथ गिरफ्तार पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। 14/10/2011 को शारदा रेंज के अंतर्गत वन कर्मियों को उत्तरी गुलियाना बीट की गश्त के दौरान कालोनिया नाले के पश्चिम ओर झाड़ी के बीच एक टाइगर की खाल बरामद की गई।
वन कर्मियों ने कब्जे में लेकर पशु चिकित्सको के पैनल ने 15 अक्तूबर 2011 को टाइगर के शव का पोस्टमार्टम किया गया। 17 अक्तूबर 2011 को वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने वन उत्तरी गुलियाना में तीन संदिग्ध व्यक्तियों को देखा। इन्हें पकड़ा गया तो मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद याकूब, अब्दुल करीम ने पूछताछ में नरेश, जवीर अली साथ होने का नाम बताया। इनके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट टनकपुर की अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन तीन वर्ष का सश्रम करावास, दस दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। चार वर्षों तक चली अपील का फैसला सुनाते हुए जिला और सत्र न्यायाधीश अनुज संगल ने पांचों अभियुक्तों की अपील स्वीकार की और न्यायिक मजिस्ट्रेट टनकपुर के फैसले को खारिज कर दिया। संवाद