लोहाघाट के भेटी कर्णकरायत निवासी युवा काश्तकार रघुवर दत्त मुरारी लोगों के लिए मिसाल बने हुए हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त इस किसान ने माटी से जुड़कर सफलता की इबारत तो लिखी ही वहीं वे लोगों को खेती से जुड़ने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
44 वर्षीय रघुवर दत्त मुरारी 20 नाली भूमि में सब्जी उत्पादन करने के साथ डेयरी और मत्स्यपालन कर रहे हैं। वह हर साल तीन लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। जैविक पत्ता गोभी, फूल गोभी, बैंगन, आलू, टमाटर, शिमला मिर्च, ब्रोकली, चुकंदर, गाजर, खीरा, ककड़ी, लौकी, धान, मडुवा, गेहूं आदि का उत्पादन करते हैं।
इन सब्जियों को वे लोहाघाट और अन्य शहरों में भेजते हैं। उनके खेत में जैविक रूप से उगाई गई आधा किलो की शिमला मिर्च और तीन किलो वजनी बैगन आकर्षण का केंद्र है। रघुवर रोजाना 20 लीटर दूध का उत्पादन भी कर रहे हैं।
मिल चुके हैं कई पुरस्कार
लोहाघाट (चंपावत)। रघुवर को गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय से प्रगतिशील काश्तकार, ग्राम्या से प्रगतिशील किसान, कृषि पंडित, किसानश्री आदि से नवाजा जा चुका है।
खेती से रुकेगा पलायन
लोहाघाट (चंपावत)। मुरारी पहाड़ से लगातार हो रहे पलायन पर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि व्यक्ति में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो वे मिट्टी से भी सोना पैदा करने की क्षमता रखता है। युवा नशे से दूर रहकर खेतीबाड़ी, दुग्ध उत्पादन के कार्य में मनोयोग से जुट जाएं तो वह सम्मानजनक ढंग से परिवार की परवरिश कर सकते हैं।
जैविक विधि से उगाई गई आधा किलो वजनी शिमला मिर्च का प्रदर्शन करते किसान रघुवर मुरारी।- फोटो : LOHAGHAT