लोहाघाट (चंपावत)। विकासखंड बाराकोट के नौमाना गांव के सेरा तोक निवासी युवा अमित जोशी कोरोना काल में दो साल पहले लगे लॉकडाउन के बाद घर लौटे थे। अब वह सब्जियों की खेती कर सम्मानजनक जीवनयापन कर रहे हैं। अमित लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार कर वहां से पलायन न करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
दो वर्ष पहले कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के बाद महानगरों में होटलों, फैक्टरियों में कार्य करने वाले प्रवासी लोग अपने घरों को लौट आए। इनमें दिल्ली की एक कंपनी में काम करने वाले 27 वर्षीय अमित भी शामिल थे। अमित का कहना है कि नौकरी छूटने और रोजगार न मिलने पर उन्होंने गांव में सब्जी उत्पादन की ठान ली। अब वह करीब 12 नाली भूमि में फ्रासबीन, कद्दू, टमाटर, मूली उगाकर बाजार में बेच रहे हैं। नौमाना तक सड़क की सुविधा है, लेकिन सेरा तोक तक सड़क सुविधा न होने के कारण उन्हें अपने उत्पादों को सड़क तक लाने में परेशानी हो रही है। अमित ने सरकार से पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने, युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने की मांग की है।
आधा किमी दूरी से खेतों तक पहुंचाया पानी
लोहाघाट (चंपावत)। अमित में खेती के प्रति इतना जुनून है कि उन्होंने करीब 500 मीटर दूरी से प्लास्टिक के पाइपों के जरिये सेरा गधेरे से खेतों तक पानी पहुंचाया है। हालांकि गर्मियों में पानी की कुछ दिक्कत रहती है, लेकिन वर्षभर पर्याप्त मात्रा में पानी होने से खेतों की सिंचाई हो जाती है। अमित का दर्द है कि हाड़तोड़ मेहनत करने के बावजूद सुअर, बंदर आदि जंगली जानवर उनकी फसलों को चौपट कर रहे हैं। उन्होंने जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा की भी मांग की है।
मामूली नौकरी के बजाय खेती करने से अधिक लाभ
लोहाघाट (चंपावत)। अमित लोगों को गांवों से पलायन न करने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांवों से पलायन कर मामूली नौकरी के लिए महानगरों में जाने के बजाय लोगों को खेती करनी चाहिए। इससे अधिक लाभ हो सकता है क्योंकि होटलों, कंपनियों में मिलने वाला मानदेय किराये, खाना, आने-जाने में ही खर्च हो जाता है। उन्होंने युवाओं से क्षेत्र में खेती कर सम्मानजनक ढंग से जीवनयापन करने की अपील की है।