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गन्ना नहीं बिकने से किसान परेशान

Wed, 13 Dec 2017 10:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बनबसा (चंपावत)।
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सितागंज चीनी मिल इस बार बंद होने से क्षेत्र के गन्ना उत्पादक खासे परेशान हैं। मझोला मिल द्वारा गन्ना नहीं लिए जाने से किसानों के आगे खेतों में खड़ी गन्ने की फसल को आग लगाने की नौबत आ गई है। गेहूं की नई फसल की बुआई का समय निकलने से कई किसान नुकसान में मझोला (यूपी) स्थित कोल्हू वालों को गन्ना बेचने को विवश हैं। किसानों ने गन्ने की बिक्री से पहले सितारगंज शुगर मिल को पीपीपी मोड पर देने के सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

बनबसा में करीब छह हजार तो टनकपुर में करीब आठ हजार क्विंटल गन्ना उत्पादन होता है। इस बार सितारगंज चीनी मिल बंद होने से बनबसा-टनकपुर के गन्ना उत्पादक अपने गन्ने की बिक्री को लेकर परेशान है। किसानों ने बताया कि किच्छा चीनी मिल की ओर से यहां के किसानों का गन्ना नहीं लिए जाने से उन्हें अपनी फसल बेचने में दिक्कत आ रही है। क्षेत्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक जगत सिंह मिताड़ी ने बताया कि गन्ने का सरकारी मूल्य 315 रुपये प्रति क्विंटल होने के बाद किसान मझोला स्थित गुड़ बनाने वाले कोल्हू में 130 से 150 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना बेच रहे हैं।
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प्रगतिशील किसान और राज्य बागवानी पुरस्कार प्राप्त पुष्कर कापड़ी ने बताया कि गेहूं की फसल बुआई का समय निकलने और गन्ना नहीं बिकने से किसानों ने खेतों में खड़ी गन्ने की फसल जलाने का निर्णय लिया है। गन्ना उत्पादक उस्मान, हरीश श्रीवास्तव, कै. विरेंद्र रजवार, कै. हरीश कापड़ी आदि ने बताया कि गन्ना नहीं बिकने से किसान फसल में आग लगाएगा। टनकपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष और प्रमुख गन्ना उत्पादक जगत सिंह रावत ने बताया कि टनकपुर में करीब आठ हजार क्विंटल गन्ना खेतों में खड़ा है। गन्ने की बिक्री को लेकर किसान परेशान हैं।
 
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