चंपावत में खुले बाजार में प्याज के पौधे बेचते सुरेश जोशी।
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प्याज की खेती करने वाले चंपावत के किसानों को इस बार प्याज के सरकारी पौधे नहीं मिल सकेंगे। इसकी वजह चंपावत उद्यान विभाग की सेलाखोला नर्सरी में प्याज की पौध तैयार नहीं किया जाना है। इसके चलते चंपावत के किसान बाजार से ऊंचे दाम पर पौध खरीदने को मजबूर हैं।
उद्यान विभाग की पाटन और दिगालीचौड़ नर्सरी में प्याज की पौध तैयार की गई है। पिछले साल किसानों को 40 रुपये में एक हजार पौधे चंपावत नर्सरी से प्राप्त हो रहे थे। इस बार चंपावत के किसानों को बाजार से एक हजार पौधों के लिए 300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जिले में 227 हेक्टेयर क्षेत्रफल एरिया में 1042 मीट्रिक टन प्याज की पैदावार होती है।
उद्यान विभाग जिले के सेलाखोला, मुड़ियानी, गोशनी, खतेड़ा, दिगालीचौड़ और पाटन की नर्सरियों में पौध तैयार करता है। समय पर बीज न मिलने और नर्सरियों में पानी की कमी होने के कारण चंपावत की नर्सरियों में प्याज की पौध तैयार नहीं की गई है।
सुरेश चंद्र, गंगा सिंह, हयात सिंह, सुंदर सिंह आदि किसानों का कहना है कि प्याज के खेती के लिए खेत तैयार किए जा चुके हैं लेकिन इस बार प्याज की पौध नहीं मिल पा रहे हैं। बाजार में बीज बहुत महंगा मिल रहा है। किसानों ने उद्यान विभाग से जल्द सरकारी दरों पर प्याज की पौध देने की मांग की है।
जिले की दो नर्सरियों में प्याज की पौध तैयार की गई है। चंपावत के किसानों की मांग पर उन्हें पौध उपलब्ध कराई जाएगी। पौध की कमी होने पर बाहरी जिलों से भी प्याज के पौधे मंगा कर किसानों को दिए जाएंगे। एनके आर्या, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।