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अप्रैल भी बीता, खत्म नहीं हुआ इंतजार

Sun, 30 Apr 2017 10:59 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
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खुलने के इंतजार में चंपावत का ब्लड बैंक भवन। - फोटो : amar ujala
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रविवार को अप्रैल भी खत्म हो गया, लेकिन दावों के विपरीत ब्लड स्टोरेज यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका। यूनिट से संबंधित तमाम उपकरण और कर्मियों का प्रशिक्षण एक सप्ताह पूर्व पूरा हो चुका है मगर इसके संचालन में अड़चन ब्लड ट्रांसफर वैन (बीटीवी) की उपलब्धता को लेकर है।
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चंपावत में करीब पांच साल पूर्व ब्लड बैंक भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन इसका संचालन अबतक नहीं हो पाया। पिछले साल जून में खून की कमी से एक गर्भवती महिला की मौत के कारण उपजे जन विरोध के बाद कार्यवाही में तेजी तो आई, मगर ब्लड बैंक तो दूर, ब्लड स्टोरेज तक का काम अब भी शुरू नहीं हुआ है।

चंडीगढ़ से आई टीम ने 18 अप्रैल को ब्लड स्टोरेज यूनिट में लगाए गए विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इंस्टॉलेशन करने के साथ ब्लड स्टोरेज सेंटर के लिए नियुक्त कर्मी व लैब तकनीशियनों को प्रशिक्षित भी किया बावजूद इसके स्टोरेज यूनिट शुरू नहीं हो सकी है।
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मदर यूनिट पिथौरागढ़ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. नरेंद्र चंद्र शर्मा का कहना है कि ब्लड स्टोरेज यूनिट से तात्कालिक तौर पर चंपावत की जरूरत पूरी की जा सकेगी। इस ब्लड बैंक से यहां की जरूरत के हिसाब से खून की आपूर्ति की जाएगी। ब्लड स्टोरेज यूनिट में सभी ब्लड ग्रुप की पांच यूनिट रखी जाएगी।

इसके लिए रक्त को निर्धारित तापमान में पिथौरागढ़ से चंपावत ले जाने के लिए बीटीवी चाहिए, लेकिन जिले में बीटीवी की कोई सुविधा नहीं है। राज्य एड्स नियंत्रण समिति (नाको) के सहायक परियोजना निदेशक डॉ. विनोद टोलिया का कहना है कि कूल बॉक्स में रक्त को लाना लेजाना जोखिमभरा है। नाको ने इसके लिए बीटीवी की जरूरत बताई है। यह वैन कुमाऊं में सिर्फ हल्द्वानी में है। वहां से इसकी अनुमति के बाद ही ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू हो सकेगी।

ब्लड स्टोरेज यूनिट के लिए मदर यूनिट पिथौरागढ़ से नियमित रूप से खून की जरूरत होगी। इसके लिए बीटीवी चाहिए। इसके लिए महानिदेशक (ब्लड सेल) को 24 अप्रैल को पत्र भेजा गया है। अनुमोदन मिलने के बाद स्टोरेज यूनिट शुरू हो जाएगी। -डॉ. आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।

खून लेने पर सालाना 10 लाख रुपये खर्च होते है 
जिला अस्पताल बनने के बावजूद जिले के पहाड़ी हिस्से के लोगों को खून के लिए 75 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ और मैदानी हिस्से टनकपुर, बनबसा के लोगों को करीब 85 किमी की दौड़ लगानी पड़ती हैं। जिले के करीब 430 लोगों को सालभर में रक्त की जरूरत पड़ती है। खून के लिए एक शख्स को औसतन 2500 रुपये आवाजाही में ही खर्च करने पड़ते हैं।

सालभर में यहां के लोगों को 10.75 लाख रुपये खर्च करने को मजबूर होना पड़ता रहा है। ब्लड बैंक या स्टोरेज यूनिट शुरू होने से लोगों को खर्चे के साथ ही परेशानी से भी निजात मिलेगी।
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