चंपावत। अक्तूबर में आई आपदा के जख्मों पर मरहम लगने का लोग अब भी इंतजार कर रहे हैं। साढ़े चार माह बीतने के बाद भी व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं लौट पाई हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी बारहमासी सड़क अभी तक ठीक नहीं हो सकी है। यह सड़क पूरा होने से पहले ही बुरी तरह टूट गई है। अब निर्माण पूरा होने की समयावधि भी बढ़ गई है। वहीं निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर बन रहा चल्थी पुल भी इस आपदा में जमींदोज हो गया था। इससे पुल के पूरा होने की समयावधि दिसंबर 2021 के बजाय इस साल जून तक खिसक गई है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी सड़क का निर्माणाधीन चल्थी पुल 17 अक्तूबर की मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ गया। बारिश ने इस निर्माणाधीन पुल के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचाया। आपदा से पुल के पांच जैक के क्षतिग्रस्त होने के अलावा दो फाउंडेशन लधिया टावर नदी में बह गए। एनएच खंड के ईई सुनील कुमार ने बताया कि चंपावत से 39 किमी दूर चल्थी में लधिया नदी पर 120 मीटर लंबा और 14.90 मीटर चौड़ा पुल निर्माणाधीन है। 2019 से शुरू पुल के निर्माण में खंभों सहित 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया था, लेकिन आपदा ने इस पुल को तगड़ा झटका लगा दिया।
वैसे 2017 से शुरू टनकपुर-पिथौरागढ़ की 133 किमी लंबी बारहमासी सड़क का काम नवंबर 2020 के तय समय पर पूरा नहीं हो सका। पिछले साल अक्तूबर में आई अतिवृष्टि से सड़क जगह-जगह से टूट गई है। वैसे विभाग का दावा है कि आवाजाही में जोखिम कम करने के लिए सड़क का मलबा हटाने से लेकर छूटे कार्यों को फिर से शुरू कराया जा रहा है।
आपदा में क्षतिग्रस्त निर्माणाधीन चल्थी पुल को अभी सीधा करने में दो माह से अधिक समय लग जाएगा। जैक लगाकर इस टूटे पुल को उठाया जा रहा है। कुछ हद तक सीधा भी कर दिया गया है। जैक से टावरों में बिठा लिया जाएगा। उसके बाद इसके निर्माण की आगे की कार्रवाई की जाएगी। - सुनील कुमार, ईई, एनएच खंड, लोहाघाट।
आपदा से क्वैराला पेयजल योजना को 58 लाख का नुकसान
चंपावत। आपदा ने 30 करोड़ की क्वैराला पेयजल योजना को भी तगड़ा झटका दिया। जल निगम के ईई वीके पाल ने बताया कि आपदा से 58 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आपदा की वजह से काम पूरा होने में तीन माह और लगने की संभावना है।
आपदा की मार ने दिया 129 करोड़ का झटका
चंपावत। पिछले साल 17 से 19 अक्तूबर तक हुई मूसलाधार बारिश की इस जिले को भारी कीमत चुकानी पड़ी। 26 विभागों की 1782 योजनाओं पर मार पड़ी है। सरकारी संपत्ति की ही 129.58 करोड़ रुपये से ज्यादा चपत लगी है। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान सड़कों को हुआ। इसके अलावा पेयजल, बिजली, सिंचाई विभाग की योजनाओं को भी भारी नुकसान हुआ है। डीएम विनीत तोमर ने बताया कि अक्तूबर की आपदा से हुई क्षति का ब्योरा पिछले साल नवंबर में मंडलायुक्त को भेजा गया था। बजट के अलावा चुनाव आचार संहिता की वजह से बहुत से काम शुरू नहीं हो सके हैं।