स्वांला के पास बुधवार सुबह हुए वाहन हादसे की क्या वजहें रही, इसका खुलासा तो मजिस्ट्रेटी जांच में होगा, लेकिन इस हादसे के लिए टनकपुर पुलिस की ढिलाई सबसे ज्यादा जिम्मेदार रही है।
पुलिस के रिकार्ड में दर्ज समय पुलिस की लापरवाही को उजागर कर रहा है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार ककरालीगेट पर स्थित पुलिस पिकेट से इस जीप (मैक्स) को पांच बजे भेजा गया। चल्थी चौकी में जीप की एंट्री सुबह पांच बजकर पांच मिनट पर हुई है। यानी इस जीप ने महज पांच मिनट में ककरालीगेट से 36 किमी दूर चल्थी तक की दूरी तय कर ली।
यही नहीं चल्थी पुलिस चौकी के रजिस्टर में की गई एंट्री में जीप में चालक सहित केवल नौ लोग दर्ज किए गए हैं जबकि स्वांला की खाई में दुर्घटना के बाद दस शव मिले। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जीप में आखिर दसवां व्यक्ति कहां से आ गया।
वाहन दुर्घटना में जान गंवा चुके लोगों को देखकर नहीं लगता है कि दसवां यात्री चल्थी के बाद इस जीप पर बैठा होगा। दरअसल, चल्थी चौकी में रोडवेज बसों के अलावा निजी टैक्सी वाहनों में बैठी सवारियों की संख्या, आने-जाने का समय, चालक-परिचालक का नाम आदि दर्ज किया जाता है। सामान्य दिनों में वाहनों में सवारियों की संख्या की गिनती करने से बचने के लिए पुलिस चालकों की ओर से बताई गई यात्रियों की संख्या को ही रजिस्टर में दर्ज करती है। बृहस्पतिवार को चल्थी चौकी पुलिस ने इस संबंध में पुलिस द्वारा सिर्फ रोडवेज बसों की सवारी की एंट्री ही रजिस्टर में दर्ज करने के बात कहकर अपना पल्ला झाड़ दिया था।
चल्थी चौकी के प्रभारी पीआर विश्वकर्मा के अनुसार उन्हें पांच बजे चल्थी में लगे बैरियर को खोलने के निर्देश हैं। बृहस्पतिवार को भी यही किया गया था। दुर्घटनाग्रस्त वाहन ककरालीगेट खुलने के बाद ही चल्थी चौकी से गुजरा था। चालक ने स्वयं चौकी में आकर वाहन में आठ यात्री और स्वयं के होने की सूचना दर्ज कराई थी तथा रजिस्टर में हस्ताक्षर भी किए थे।
देर रात और तड़के होती हैं सड़क दुर्घटनाएं
चंपावत। आमतौर पर अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं देर रात और तड़के गाड़ी चलाने से होती हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रश्मि भट्ट के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाना, चालकों द्वारा तेज वाहन चलाना और यातायात के नियमों का पालन न करना, नींद की झपकी आना भी सड़क दुर्घटना होने के प्रमुख कारण हैं। परिवहन विभाग और पुलिस की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर वाहन चालकों को यातायात नियमों की जानकारी देने और उन पर अमल करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
शराब पिये होने की पुष्टि पर लाइसेंस निरस्त होगा
चंपावत। पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सभी वाहन चालकों से यातायात के नियमों का पालन करवाया जाना महत्वपूर्ण है। चालकों के नशे की स्थिति में वाहन चलाने से ही अक्सर हादसे होते हैं। इसे देखते हुए पुलिस की ओर से वाहन चालक के शराब पिये हुए होने का पता करने के लिए एल्कोमीटर से जांच का अभियान चलाया जा रहा है। वाहन चलाने के दौरान शराब पीने की पुष्टि होने पर संबंधित चालक के लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
आंखों की खराबी के बाद भी दौड़ा रहे हैं वाहन
चंपावत। लंबी दूरी का सफर तय करने वाले वाहन चालकों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। हालांकि, चालकों को लाइसेंस जारी करते समय स्वास्थ्य परीक्षण संबंधी कागजी औपचारिकताएं तो पूरी की जाती हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही होती है। इस बात का खुलासा पुलिस की ओर से एक माह पहले आयोजित किए गए चालकों के नेत्र परीक्षण शिविर में उजागर हुई। शिविर में करीब चार सौ चालकों के नेत्र परीक्षण में सौ से अधिक चालकों की आंखें खराब पाई गईं। इनमें से चिकित्सकों ने 60 से अधिक चालकों को आंखों का इलाज करने की सलाह दी गई थी।
सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रहा है मोबाइल
चंपावत। भले ही स्वांला हादसे में वाहन दुर्घटना का कारण चालक को नींद की झपकी आना रहा हो या कुछ और, मगर सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण अब मोबाइल भी बनता जा रहा है। वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग नहीं करने के लिए यातायात पुलिस की ओर से सलाह दी जाती है पर अधिकतर चालक यातायात के सामान्य नियमों का पालन भी नहीं करते हैं। यातायात उपनिरीक्षक ज्योति प्रकाश का कहना है कि यातायात नियमों के अनुसार वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना कानून की अवहेलना की श्रेणी में आता है। इस तरह से मोबाइल का प्रयोग करने वाले चालक खुद अपनी जान ही जोखिम में नहीं डालते हैं, बल्कि दूसरे निर्दोष यात्रियों के लिए जान का खतरा भी बन रहे हैं।