नए साल पर मां पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालु अब कार्बेट पार्क की तर्ज पर विकसित हो रहे नंधौर वन्यजीव अभयारण्य का भी लुत्फ उठा सकेंगे। अभयारण्य में हाथी, शेर, लैपर्ड एवं कुलाचे मारते हिरन, बारहसिंघा को सफारी वाहन से देख पाएंगे। इसके लिए टनकपुर के ककरालीगेट में अभयारण्य का प्रवेश द्वार तैयार हो गया है। तीन माह के भीतर सफारी वाहन चलाने की तैयारी शुरू हो गई है। डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल ने बताया कि पर्यटक एवं सफारी वाहनों के प्रवेश की दरें निर्धारित कर दी गई हैं। जल्द ही ऐसे वाहनों का पंजीकरण शुरू किया जाएगा।
वर्ष 2012 में नंधौर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना की गई थी। करीब 26 हजार से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में वन्यजीवों के संरक्षण एवं पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल हुई थी। इसी के तहत जंगल सफारी के लिए नंधौर के साथ ही टनकपुर के ककरालीगेट में प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। अभयारण्य में नंधौर प्रवेश द्वार से जंगल सफारी शुरू हो गई है, लेकिन टनकपुर प्रवेश द्वार से अभी पर्यटकों का प्रवेश शुरू नहीं हो पाया है। इसे लेकर विधायक कैलाश गहतोड़ी ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ बूम वन विश्राम गृह में तैयारियों को लेकर मंथन किया।
उन्होंने डीएफओ से तीन माह के अंदर जंगल सफारी शुरू कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा अभयारण्य के आसपास के पर्यटन स्थलों के विकास की भी रणनीति बनाई गई। डीएफओ ने अभयारण्य में टनकपुर प्रवेश द्वार के साथ ही चकरपुर में बनखंडी महादेव मंदिर के पास सेनापानी मार्ग पर भी प्रवेश द्वार का निर्माण कराने की बात कही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही सफारी वाहनों का प्रवेश शुरू किया जाएगा। यह भी बताया कि टनकपुर के ककरालीगेट से जंगल में प्रवेश करने वाले पर्यटक सेनापानी, दोगाड़ी, किलपुरा रेंज होते हुए चकरपुर गेट से निकल सकेंगे। वहीं, चकरपुर गेट से प्रवेश करने वाले पर्यटकों की निकासी ककरालीगेट से होगी।
जंगल सफारी की दरें तय
एसडीओ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि भारतीय पर्यटकों के लिए वाहन शुल्क 250 रुपये एवं विदेश पर्यटकों के लिए यह शुल्क 500 रुपये तय किया गया है, जबकि भारतीय पर्यटकों के लिए प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क डेढ़ सौ एवं विदेश पर्यटकों के लिए 600 रुपये निर्धारित किया गया है। पर्यटकों को अभयारण्य के अंदर विभागीय गाइड के साथ ही भ्रमण करना होगा।
कुलाचे मारते हिरनों के झुंड पर्यटकों को लुभाएंगे
नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटक जहां बाघ, तेंदुए, हाथी, वन बिलाव, लोमड़ी, धारीदार लक्कड बग्गा, भालू, बिज्जु, उद बिलाव, सुअर, सेही, खरा एवं कुलाचे मारते कांकड़, सांभर, बारहसिंगा को नजदीक से देख सकेंगे। वहीं, पर्यटकों को गिद्ध, हार्नबिल, उल्लू, किंगफिशर, शाह बुलबुल समेत कई प्रजातियों के पक्षियों का कलरव भी लुभाएगा। हाथी के साथ ही अजगर समेत कई प्रजाति के सांप भी दिखाई पड़ेंगे। पर्यटकों के ठहरने के लिए जौलासाल वन विश्राम भवन, टनकपुर वन विश्राम गृह और बूम वन विश्राम गृह को तैयार कर दिया गया है।