करीब 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एबटमांउट में बन रहे ईको हट में रहकर पर्यटक जल्द ही हिमालय हिट (जा) सकेंगे या यू कहें इन्हीं ईको हटों से सैलानी सूर्योदय के समय की खूबसूरत छटा में हिमालय के दर्शन कर सकेंगे। ईको लॉग हटों के निर्माण में फ्रांस से विशेष रूप से ऐसी लकड़ी मंगाई गई है, जिसे रसायनों में शोधित कर हल्का और काफी टिकाऊ बनाया गया है। कुमाऊं में यह नया पर्यटन केंद्र बनने जा रहा है। अक्तूबर-नवंबर में यहां हिमदर्शन का अलग ही आनंद है। ऐसा प्रतीत होता है मानो हिमालय सामने आ खड़ा हो गया हो।
उत्तराखंड पर्यटन विभाग एबटमांउट को सुरम्य स्थल के रूप में विकसित करने जा रहा है। लोहाघाट से मात्र सात किमी की दूरी पर स्थित एबटमाउंट में चार करोड़ 95 लाख 70 हजार रुपये की लागत से आठ ईको लॉग हटों का निर्माण किया जा रहा है, जहां सभी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ईको हट के साथ एक बहुउद्देश्यीय हॉल, अत्याधुनिक शौचालय का भी निर्माण किया जा रहा है। इस स्थान पर एक साथ 15 से 20 पर्यटक ठहर सकते हैं।
साथ ही बहुउद्देश्यीय भवन में बैठकें भी करने की उन्हें सुविधा मिलेगी। इस स्थान में सुरम्य खेल का मैदान है, जो चारों ओर से वनों की हरियाली से आच्छादित है। यहां खेलने का अलग ही आनंद है। हटों के निर्माण में अधिकांश धनराशि लकड़ी आयात करने में व्यय की गई है। जल निगम की निर्माण इकाई की ओर से बनाए जा रहे हटों के लिए अभी तक तीन करोड़ 57 लाख 44 हजार रुपये मिले हैं।
एबट ने बंगाली से खरीदी थी जमीन
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सबसे पहले यहां पर्यावरण प्रेमी एवं सेना के अधिकारी हेरल्ड एबट ने 516 एकड़ भूमि बंगाली से खरीदी थी। बाद में उन्होंने इसके छोटे-छोटे प्लाट काटकर अंग्रेजों को बेच दी और उन्हें यहां बसाने का प्रयास किया। तब से इस वनाच्छादित पहाड़ी का नाम एबटमाउंट पड़ गया। इस स्थान में उन्होंने 1942 में अपनी पत्नी की स्मृति में चर्च का भी निर्माण किया था। उनकी मृत्यु भी यहीं पर हुई थी।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग से करते हैं पानी का भंडारण
एबटमाउंट में रहने वाले अधिकांश लोग पीने के पानी के लिए तरसे रहते हैं। यहां सभी लोग रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए पूरे साल के लिए पानी का भंडारण करते आ रहे हैं। लेकिन ईको लॉग हटों के लिए जल निगम द्वारा ट्यूबवेल के माध्यम से यहां पेयजल की उपलब्धता के लिए तीन सौ फीट गहराई से शुद्ध जल की व्यवस्था की गई है। बांज की जड़ों से निकलने वाले पानी को विशेष रूप से शुद्ध माना जाता है।
अवशेष राशि न मिलने से कार्य अटका
कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक आरके भार्गव का कहना है कि पूर्व लागत में ही यह निर्माण कार्य संपन्न कराया जा रहा है, लेकिन अवशेष एक करोड़ 15 लाख रुपये की धनराशि न मिलने से फिलहाल काम बंद पड़ा हुआ है। यदि यह धनराशि शीघ्र मिल जाती है तो विभाग इसका निर्माण कार्य बहुत जल्द पूरा कर उसे पर्यटकों के लिए खोल देगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा रहता है खास
एबटमाउंट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां से हिमालय की सबसे लंबी श्रृंखला का दर्शन किया जा सकता है। नेपाल के आधे भाग से लेकर बदरीनाथ तक की हिम श्रृखला में पंचाचूली, नंदाकोट, नंदा खाट, चौखंभा तथा सबसे ऊंची नंदा देवी चोटी आदि के एक साथ दर्शन किए जा सकते हैं। यहां सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय का नजारा ही व्यक्ति को प्रकृति के आगोश में बांध देता है।