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स्वास्थय उपकेंद्र में पानी की सुविधा नहीं

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मंगललेख स्वास्थ्य उप केंद्र का जगह-जगह क्षतिग्रस्त भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
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स्व जिले के दूरस्थ मंगललेख क्षेत्र के मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण उप केंद्र का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पाता। यहां की एएनएम के पास पांच अन्य केंद्रों की जिम्मेदारी होने के कारण मंगललेख उप केंद्र महीने में बमुश्किल पांच दिन खुल पाता है। इसके इमारत निर्माण और मरम्मत में मोटी रकम खर्च होने के बावजूद केंद्र में न बिजली है और न ही पानी। शौचालय भी उपयोग करने की स्थिति में नही है।
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लधिया घाटी के मंगललेख उप केंद्र में जरूरी संसाधनों की कमी से तीन ग्राम पंचायत के लोगों को समस्या हो रही है। इस केंद्र में टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं को इलाज की थोड़ी बहुत सुविधा मिल पा रही है। आबादी से दूर बने केंद्र के भवन के हाल भी ठीक नहीं है। दरवाजे, मेज-कुर्सी आदि की हालत बेहद बुरी है। पानी और बिजली का कनेक्शन नहीं है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह सहित अन्य ग्रामीणों का कहना कि जरूरी सुविधाएं न होने से लोगों को केंद्र का लाभ नहीं मिल रहा है। चार साल पूर्व चहारदीवारी और पेयजल लाइन बिछाने पर 8.93 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
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इसके बावजूद नलों में पानी नहीं आता है। अब 2019-20 में तीन लाख रुपये से मरम्मत और अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि इस रकम से टूटफूट के अलावा पेयजल और बिजली की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके बाद यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधरेंगी।
एएनएम 1, जिम्मा 6 उप केंद्रों का
रीठा साहिब (चंपावत)। लधिया घाटी क्षेत्र के अधिकतर एएनएम केंद्रों की तस्वीर ठीक नहीं है। मंगललेख उप केंद्र की एएनएम रूबीना के पास अपने उप केंद्र के अलावा पांच (रमक, वारसी, बिनवालगांव, गोलडांडा और धरसौं) अन्य केंद्रों का भी जिम्मा है। करीब 75 किमी ग्रामीण क्षेत्र में फैले इतने बड़े क्षेत्र में टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की अन्य देखरेख बेहद कठिन है। बावजूद इसके गांव के लोग उनकी कार्यशैली के कायल है। सीएमओ डॉ.आरपी खंडूरी का कहना है कि एएनएम के पद रिक्त होने की वजह से काम चलाने के लिए अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
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