जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव के मॉडलों का डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने अवलोकन किया। जीजीआईसी में हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ये मॉडल बाल वैज्ञानिकों की आधुनिक तकनीकी सोच को प्रदर्शित करता है।
उन्होंने विज्ञान प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाने के साथ नवोन्मेषी विचारों को उभारने की जरूरत बताई। विजेताओं को डीएम, डीईओ डीएस राजपूत, सत्यनारायण ने पुरस्कृत किया। जिला विज्ञान समन्वयक उमेद सिंह बिष्ट ने बताया कि महोत्सव के पहले दो विजेता 27 नवंबर से कोटद्वार में होने वाले राज्य विज्ञान महोत्सव में हिस्सा लेंगे।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अभियांत्रिकी के व्यक्तिगत छात्र प्रोजेक्ट में लोहाघाट जीआईसी के छात्र पवन कुमार प्रथम रहे। उन्होंने अपने मार्गदर्शक शिक्षक श्याम चौबे के निर्देशन में मेडिसन एटीएम का मॉडल बनाया। जबकि टीम प्रोजेक्ट में लोहाघाट होली विजडम स्कूल के इंटर के छात्र लोकेश व रिषित प्रथम रहे।
उन्होंने मार्गदर्शक शिक्षक दिनेश गड़कोटी के निर्देशन में ऑटो पावर इलेक्ट्रिकल इंजन का मॉडल बनाया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रधानाचार्य दीपक गंगवार, नवीन उपाध्याय, घनश्याम भट्ट, एके सिंह, जितेंद्र गिरी, प्रमोद कुमार, नमिता मुरारी, डॉ.एमपी सिंह, कुंदन बोहरा, नरेश राय, प्रदीप जोशी और अर्जुन छतोला शामिल थे।
कार्यक्रम में सह समन्वयक एलएम बोहरा, जीआईसी के प्रधानाचार्य मनोज जोशी, जीजीआईसी की प्रधानाचार्या निधि सक्सेना, अनि कुमार, एचसी भट्ट, नवीन पंत, सोनी पंत, एके खर्कवाल, बीना चौधरी, सुरेश आर्या आदि मौजूद थे। मार्गदर्शक शिक्षक दिनेशनाथ गोस्वामी, पवन कुमार, जगदीश बोहरा व राकेश चतुर्वेदी थे।
ये रहे विजेता
व्यक्तिगत छात्र प्रोजेक्ट में मेडिसन एटीएम बनाने वाले जीआईसी लोहाघाट के छात्र पवन कुमार प्रथम रहे। वहीं मोहित गड़कोटी और सूरज जोशी क्रमश: दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। वहीं टीम प्रोजेक्ट में ऑटोपावर इलेक्ट्रानिक इंजन बनाने वाले होली विजडम के लोकेश व रिषित को पहला स्थान मिला। वहीं टनकपुर विद्या मंदिर के विभव गड़कोटी व अभिषेक मौनी दूसरे और डीएवी लोहाघाट के विवेक व आशीष तीसरे स्थान पर रहे।
जब चाहो, जहां चाहो, रुपयों की तरह निकाल लो दवा
लोहाघाट (चंपावत)। चंपावत में हुए जिला विज्ञान महोत्सव में लोहाघाट जीआईसी के ग्यारवीं के छात्र पवन कुमार का मेडिसन एटीएम के मॉडल को प्रथम स्थान मिला। दवा देने वाले इस एटीएम के प्रोजेक्ट को बनाने में पवन को पूरे 19 दिन का समय लगा। शिक्षक श्याम चौबे के मार्गदर्शन में बनाए गए इस एटीएम का सबसे ज्यादा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिल सकेगा।
छात्र का कहना है कि इसके काम करने का तरीके कमोबेश रुपये निकालने वाले बैंकों के एटीएम की तरह ही है। मेडिसन एटीएम के लिए एक कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। एटीएम मशीन दवा की मांग करने वाले से उसका कोड मांगेगी।
कोड फीड करने पर रोग का नाम, दवा के नाम, दवा की मात्रा व कीमत के विकल्प को पूरा करना होगा। खाते से रकम कटने के साथ ही मेडिसन एटीएम से दवा मिल सकेगी। पवन का कहना है कि इस एटीएम का सबसे ज्यादा लाभ गांव और मेडिकल स्टोरों की कमी वाले स्थानों पर होगा। अब इस प्रोजेक्ट को राज्य प्रतियोगिता में प्रदर्शित किया जाएगा।