जिले में हिंदी भाषा के उन्नयन, संरक्षण और संवर्धन के लिए विभिन्न साहित्यकारों की ओर से भागीरथ प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं साहित्यकारों में शामिल हैं जिला मुख्यालय के भैरवां वार्ड में निवास करने वाले साहित्यकार और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डा‘. विष्णु शास्त्री ‘सरल’।
आठ मई 1957 को चंपावत जिले के पाटी विकासखंड के गागर गांव में जन्मे विष्णु शास्त्री ने हिंदी और संस्कृत विषय में एमए करने के अलावा एलटी, पीएचडी, साहित्याचार्य, साहित्य रत्न, हिंदी प्रभाकर और धर्म विशारद की डिग्रियां हासिल की है। वह अब तक कई काव्य संग्रह, कहानी संग्रह और निबंध संग्रहों की रचना कर हिंदी भाषा को नई ऊंचाइयां प्रदान करने के कार्य में जुटे हुए हैं।
शिक्षा विभाग में सेवा के दौरान से ही विभिन्न रचनाओं का निर्माण करने वाले सरल एक वर्ष पूर्व जीआईसी देवीधुरा से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी तरह से मातृभाषा हिंदी की सेवा में जुटे हुए हैं।
उन्होंने बाल काव्य संग्रह ‘बच्चों का संसार’, खंडकाव्य ‘सपने’, बाल कहानी संग्रह ‘सुनो कहानी’, बाल काव्य ‘तुतलाते बोल’, बालगीत संग्रह ‘गाओ गीत’, गीत संग्रह ‘गीत बहार’ और ‘फूल खिले’, दोहा संग्रह ‘दोहांजलि’, गजल संग्रह ‘मेरी कुछ गजलें’, अतुकांत कविता संग्रह ‘समय के साक्ष्य’ और ‘द्वार-द्वार फेरी’, कहानी संग्रह ‘मां की याद’, हिंदी लघु कथा ‘कथा लोक’, निबंध संग्रह ‘विचार पथ’, शोध प्रबंध ‘तुलसी का जीवन दर्शन’ और कुमाऊंनी कविताएं ‘आपणी द्येलि’ और ‘चेयलि’ का प्रकाशन कर चुके हैं। डॉ. सरल के अनुसार हिंदी भाषा को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने का उनका प्रयास जारी रहेगा। उनके अप्रकाशित काव्य संग्रह में भाव सुमन, वर्तिका ज्योति, मधुरिमा आदि शामिल हैं।
साहित्य चेतना मंच भी हिंदी संरक्षण की मुहिम में जुटा
चंपावत। जिला मुख्यालय में करीब पांच साल पूर्व गठित किए गए साहित्य चेतना मंच के माध्यम से भी हिंदी भाषा के संरक्षण की मुहिम चलाई जा रही है।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार डॉ. बीसी जोशी, डॉ. डीडी जोशी, डॉ. टीआर जोशी, डॉ. एमपी जोशी, डॉ. विष्णु शास्त्री सरल, राजेंद्र प्रसाद गहतोड़ी, हिमांशु जोशी, डॉ. प्रकाश जोशी, प्रो. बीडी सुतेड़ी, डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा, सुभाष जोशी, मदन सिंह महर, अंजू पांडेय, अनुराग सिंह, पुष्कर सिंह बोहरा, राम प्रसाद आदि के नेतृत्व में साहित्य मंच की ओर से प्रत्येक माह काव्य गोष्ठी का आयोजन कर हिंदी साहित्यकारों को मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।