चंपावत। कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। रविवार को चंपावत का न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ऐसे में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को दिक्कतें बढ़ रही हैं। अस्पतालों में भी मरीज बढ़ रहे हैं। खासकर निमोनिया, सर्दी-जुकाम के मरीज काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ बीमारी से बचाव के लिए खास एहतियात बरतने पर जोर दे रहे हैं। जिले में जिले में सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं, वहीं एक भी हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं होने से चुनौती गंभीर बनी हुई है।
चंपावत के सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बीमारी से बचने और बीमार होने के बाद स्वस्थ होने के लिए उपयोगी सुझाव दिए हैं। ठंड में नसें सिकुड़ने से रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। इससे दिल से लेकर दिमाग तक खून की आपूर्ति प्रभावित होने से हृदयाघात, ब्रेन स्ट्रोक, लकवा आदि का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह ठंड में पांच साल तक के बच्चों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। मौसमी संक्रमण का खतरा बढ़ने से निमोनिया की शिकायत ज्यादा रहती है। किसी भी तरीके की दिक्कत होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
बच्चों के लिए ये एहतियाती कदम उठाएं
संक्रमण फैलने से बचाने के लिए संक्रमित बच्चे को अन्य बच्चों के संपर्क में नहीं आने दें।
बच्चों को धुएं से बचाएं।
धूप में तेल की मालिश करें।
गरम कपड़ें पहनें।
बुजुर्गों के लिए नसीहत
बुजुर्ग धूप में रहे, ठंड में सैर नहीं करें, हल्का व्यायाम करें, शरीर को ढक कर रखें।
ठंड में रक्तचाप कम होने के खतरे बढ़ते हैं इसलिए नियमित जांच कराएं।
मधुमेह की नियमित जांच भी जरूरी।