जिला अस्पताल में प्रसव के बाद महिला को स्टाफ नर्स ने बेटा होने की खुशखबरी दी। अस्पताल के अभिलेखों में भी मेल चाइल्ड दर्शाया गया। अस्पताल से छुट्टी के बाद परिजन जच्चा-बच्चा को लेकर घर पहुंचे तो नवजात बेटी थी। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर काम में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा काटा, तो स्टाफ नर्स ने अपनी भूल स्वीकारी। सीएमएस ने मामले में जांच बैठा दी है।
खर्ककार्की निवासी नीमा कार्की (20) पत्नी महेंद्र सिंह को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन रविवार की शाम करीब साढ़े तीन बजे जिला अस्पताल लाए, यहां कुछ समय बाद नीमा ने बेटी को जन्म दिया। प्रसव कराने वाली स्टाफ नर्स ने उसे लड़का होने की जानकारी दी। बाद में सभी औपचारिकताएं कर महिला को घर भेज दिया गया। सोमवार की सुबह जब नन्हीं बालिका की दादी ने बच्ची को देखा तो लड़की होने का पता चला।
इस पर उन्होंने नीमा के जेठ नरेंद्र सिंह और अन्य लोगों को जानकारी के लिए जिला अस्पताल भेजा। इस पर अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। परिजनों और पड़ोसियों ने अस्पताल पहुंचकर अव्यवस्था व्याप्त होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा।
सीएमएस डॉ.आरके जोशी ने तत्काल प्रसव संबंधी सभी अभिलेख तलब कर उनकी जांच के साथ संबंधितों से पूछताछ की, तो मालूम चला कि मानवीय भूल के कारण अभिलेखों में मेल चाइल्ड दर्ज हो गया था।
सीएमएस ने गठित की दो सदस्यीय जांच समिति
चंपावत। जिला अस्पताल के सीएमएस ने महिला के प्रसव के दौरान पैदा हुए बच्चे की गलत जानकारी देने और अभिलेखों में दर्ज करने के मामले में दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। सीएमएस डॉ.आरके जोशी ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए डॉ.श्वेता खर्कवाल और डॉ.उदयशंकर को निर्देशित किया गया है, जो एक सप्ताह में रिपोर्ट पेश करेंगे।
पूर्व में भी लापरवाही के कई प्रकरण आ चुके हैं सामने
चंपावत। जिला अस्पताल में पूर्व में भी इस तरह की लापरवाही के कई अन्य मामले प्रकाश में आ चुके हैं। एक गर्भवती महिला को पति के साथ रात भर अस्पताल के एक कमरे में बंद कर दिया था। अस्पताल में भर्ती मरीजों से बाहर से दवाएं मंगाने, खाने-पीने का घटिया सामान देने के मामले तो अक्सर प्रकाश में आते रहते हैं।