अनुभवी फार्मेसिस्टों ने अतिरिक्त प्रशिक्षण देकर शेड्यूल-एच की दवाओं को लिखने और वितरित करने का अधिकार देने की मांग की है। डिप्लोमा फार्मेसिट एसोसिएशन के नेता व उत्तराखंड के मीडिया प्रकोष्ठ प्रभारी फार्मेसिस्ट डॉ. सतीश चंद्र पांडेय ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है।
पहाड़ में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण अधिकांश अस्पतालों में वाह्य चिकित्सा विभाग और आपातकाल में फार्मेसिस्ट ही मुख्य जिम्मेदारी निभाते हैं। कहा गया कि उत्तराखंड के अधिकांश अस्पतालों में डॉक्टरों की जबर्दस्त कमी है। प्रदेश के 539 परिवार कल्याण उप केंद्रों में सिर्फ फार्मेसिस्ट तैनात हैं।
ऐसे में फार्मेसिस्ट ही परिवार कल्याण उप केंद्रों में ग्रामीणों का इलाज करते हैं। केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्र की जरूरत पूरा करने के लिए बीएससी कम्यूनिटी हेल्थ कोर्स या नर्सों को विशेष प्रशिक्षण देकर ग्रामीण इलाकों में दवाएं लिखने के अधिकार देने जा रही है।
वे फार्मेसिस्ट जो धरातल पर काम कर रहे हैं, उन्हें प्रभावी प्रशिक्षण देकर शेड्यूल-एच की दवाएं बांटने व लिखने का हक दिया जाना चाहिए। फार्मेसिस्ट को प्रशिक्षण के दौरान दवाओं के पाठ्यक्रम के साथ मानव शरीर विज्ञान, पैथोलॉजी, हेल्थ एजुकेशन आदि का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है।
इसके अलावा बड़े अस्पतालों में चिकित्सकीय कामकाज का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। ऐसे कई अनुभवी फार्मेसिस्ट हैं, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण देने पर बीएससी कम्यूनिटी हेल्थ कोर्स जैसे किसी नए कोर्स की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
एसोसिएशन ने फार्मेसिस्ट को भी प्रशिक्षण देकर सामान्य दवाएं लिखने का अधिकार देने की मांग की है। इससे डॉक्टरविहीन ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में रोगियों को लाभ मिल सकेगा।