चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर बारहमासी सड़क का निर्माणाधीन चल्थी पुल मुसीबत बन गया है। अक्तूबर में हुई भारी बारिश से क्षतिग्रस्त इस पुल की मरम्मत शुरू नहीं हो पा रही है।
भारी-भरकम वजन के कारण लोहे के टूटे पुल के स्ट्रक्चर को उठा कर रखने में कामयाबी नहीं मिली। इसके टेड़े होने से अलग कर रखने की कवायद भी विफल रही। दो टीमों की विफलता के बाद अब एनएच खंड ने इसके लिए तीसरी टीम को बुलाया है।
एनएच पर निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर यहां से 39 किमी दूर चल्थी में लधिया नदी पर वर्ष 2019 से पुल का काम शुरू हुआ। 120 मीटर लंबे और 14.90 मीटर चौड़ाई वाले इस पुल का निर्माण कार्य इसी साल दिसंबर तक पूरा कराया जाना प्रस्तावित था।
इसका करीब 80 प्रतिशत काम हो भी गया था, लेकिन 17 अक्तूबर से तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश में स्तंभ के ऊपर स्थापित करने के लिए रखे गए 11 मीट्रिक टन वजन के लोहे के पुल का ढांचा गिर गया।
इससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ। पुल का काम के पूरा होने में भी चार महीने का अतिरिक्त समय लग रहा है। पुल को क्रेनों के जरिये उठाने में सफलता न मिल पाने के कारण अब विशेषज्ञों का परामर्श लेकर दूसरे विकल्पों को अपनाया जा रहा है।
नहीं आई पुल की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट
चंपावत। इस साल 24 मई को तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बारहमासी सड़क के साथ निर्माणाधीन चल्थी पुल की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए थे। डीएम विनीत तोमर ने जांच के लिए पिथौरागढ़ के अधीक्षण अभियंता जेपी गुप्ता के नेतृत्व में तकनीकी जांच दल गठित किया था। इस तीन सदस्यीय तकनीकी दल ने एक माह पूर्व जांच तो पूरी कर ली, लेकिन नमूने की जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है।
चल्थी पर लधिया नदी में तीन खंभों पर बनने वाला यह पुल कसने से पहले ही अक्तूबर की मूसलाधार बारिश से गिर गया था। अब 11 एमटी वजन के इस हिस्से को जैक और क्रेनों से उठाना मुश्किल हो रहा है। पुल टेड़ा होने से इसे दोबारा लगाने में भी परेशानी हो रही है। इस कारण पुल को फिर से फिट करना चुनौतीपूर्ण है। इस काम की विशेषज्ञ तीसरी टीम को बुलाकर इसे उठाने की कवायद की जाएगी। इस वजह से पुल के काम के पूरा होने में अतिरिक्त समय लगेगा।
- सुनील कुमार, ईई, एनएच खंड, लोहाघाट।