फुरकियाझाला गांव से 13 किमी पैदल चलकर चल्थी के राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) में पहुंचे प्रकाश सिंह मायूस थे।
उनका तीन साल का बेटा सुमित उल्टी, पेट दर्द से बेहाल था लेकिन चल्थी अस्पताल से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। यहां से निराश प्रकाश बच्चे का इलाज करने के लिए आसपास के झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंचे।
ये हाल उस अस्पताल का है, जहां दो डॉक्टर हैं लेकिन इलाज के लिए अस्पताल में एक भी मौजूद नहीं। एसएडी चल्थी दिसंबर 2006 में खुला था।
वहां एक एलोपैथिक और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर की तैनाती है लेकिन अमर उजाला की टीम ने 10:25 बजे अस्पताल का जायजा लिया, तो वहां कोई डॉक्टर, फार्मेसिस्ट नहीं था।
लाखों रुपये से बने इस अस्पताल परिसर में ही स्टाफ को आवास की भी सुविधा है। चार बेड वाले इस अस्पताल में दो बेड टूटे हैं। उनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है।
चल्थी के बाद इलाज की सुविधा 38 किमी दूर टनकपुर में है। इसके बावजूद चल्थी अस्पताल का सदुपयोग नहीं हो सका है।
एनएच पर होने वाली दुर्घटनाओं आदि मौकों पर भी अस्पताल में प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता। अस्पताल में मौजूद चतुर्थ श्रेेणी कर्मी सुखबीर का कहना है कि यहां तैनात डॉक्टर टनकपुर से आते-जाते हैं।