चंपावत में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) रहे अशोक कुमार गुप्ता के कार्यकाल में हुए तमाम घोटालों के आरोपों से पर्दा उठने की उम्मीद जगी है। 11 सदस्यीय दो टीमों ने शुक्रवार से चंपावत वन प्रभाग में उनके छह साल के कार्यकाल के दौरान लीसा निकासी समेत तमाम मामलों की जांच शुरू कर दी है। खास बात यह कि एसडीओ के नेतृत्व में बनी दोनों ही टीमों में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और हल्द्वानी के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इन टीमों में चंपावत वन प्रभाग के किसी अधिकारी व कर्मचारी को शामिल नहीं किया गया है।
मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए जांच अधिकारी वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने दोनों टीमों का गठन किया है। टीम को एक सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि एसडीओ के नेतृत्व में बनी दोनों टीमों में पांच-पांच रेंजरों समेत 11 अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। हल्द्वानी के उप खंड अधिकारी (एसडीओ) रमेश चंद्र कांडपाल के नेतृत्व में बनी टीम भिंगराड़ा, देवीधुरा, लोहाघाट और दोगाड़ी रेंज के दस्तावेज खंगालेगी।
जबकि हल्द्वानी के एसडीओ देवेंद्र प्रसाद लोहनी के नेतृत्व में बनी टीम चंपावत, बूम और काली कुमाऊं रेंज की जांच करेगी। ये टीमें डीएफओ गुप्ता के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितता, धांधली, घोटाले, छिलका गुलिया की निकासी और अवैध पातन की जांच करेगी। चंपावत वन प्रभाग के डीएफओ जीवन चंद्र जोशी टीम को बाहर से सहयोग करेंगे।
चतुर्वेदी आज से चंपावत में डेरा डालेंगे
चंपावत। जांच अधिकारी और हल्द्वानी वन प्रशिक्षण संस्थान के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी शनिवार सात अक्टूबर से चंपावत में डेरा डालेंगे। वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी का कहना है कि मामले से संबंधित जानकारी कोई भी व्यक्ति उन्हें लिखित या मौखिक रूप से दे सकता है। जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाएगी। भारतीय वन सेवा के बेहद ईमानदार अधिकारी और रैमन मैगससे पुरस्कार विजेता संजीव चतुर्वेदी इससे पूर्व वन विभाग के एक रेंजर समेत पांच कर्मियों से पूछताछ कर चुके हैं।
विवादों से पहले भी नाता रह चुका है गुप्ता का
चंपावत। चंपावत में डीएफओ रहे अशोक गुप्ता का विवादों से पुराना नाता रहा है। यहां रहने के दौरान उन पर वन आरक्षी भर्ती में अनियमितता, कमीशन मांगे जाने की ऑडियो क्लीपिंग और अवैध पातन समेत तमाम आरोप लग चुके हैं। छात्र संघ से लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों ने आरोपों की जांच को लेकर कई बार आंदोलन किए। लेकिन नतीजा हर बार सिफर रहा। पिछले सप्ताह चंपावत दौरे पर आए सीएम के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) उर्वादत्त भट्ट के सामने भी भाजपा नेता नीलम गड़कोटी ने वन आरक्षी भर्ती में अनियमितता का मामला उठाया था।