धूरा गांव का यह हैंडपंप ग्रामीणों की प्यास बुझाने का इकलौता सहारा है।
- फोटो : अमर उजाला
सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इलाके धूरा गांव में लोग पानी के लिए कई बार आवाज उठा चुके हैं। तीन मांडेक्स हैंडपंप की मांग के बावजूद लंबे संघर्ष के बाद बस एक हैंडपंप मिल सका। प्यास बुझाने को यहां के लोग दूरदराज से पानी ढोने को मजबूर हैं, लेकिन पानी की मांग करने वाले ग्रामीणों को पानी के बजाय शराब पिलाने को सरकार आमादा है। इसके लिए यहां 31 मार्च से चल रहे आंदोलन को दरकिनार किया जा रहा है।
धूरा, चौड़ाकोट, बृजनगर, बयाला, गैरलेख, कैलानी, गजार, खर्काली, पातल, सूखीढांग सहित आसपास की दो हजार से अधिक की आबादी के लिए विकास के मायने नहीं है। बुनियादी सुविधाओं से ये पूरा इलाका मोहताज है। न पढ़ाई खास सुविधा नहीं इलाज की व्यवस्था। इन इलाकों के ग्रामीणों को आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए भी 11 किलोमीटर दूर श्यामलाताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।
धूरा की ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी, बीडीसी सदस्य राजेंद्र सिंह, इंद्र सिंह राना आदि का कहना है कि सबसे ज्यादा दुश्वारी यहां के लोगों की प्यास बुझाने की है। पानी के लिए इकलौता सहारा मांडेक्स हैंडपंप हैं। ग्रामीणों की प्यास बुझाने का अकेला सहारा धूरा और सूखीढांग में लगे तीन हैंडपंप हैं। इनमें से भी एक हैंडपंप खराब है।