भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार की अवधि 31 अक्तूबर को समाप्त हो जाएगी, लेकिन यदि व्यापारी और ट्रेड ऑफिसर व्यापार की अवधि बढ़ाने की मांग करें तो इसे 15 नवंबर तक और बढ़ाया जा सकता है। अपर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि फिलहाल अभी तक ट्रेड ऑफिसर की ओर से ऐसी कोई डिमांड जिला प्रशासन को नहीं भेजी गई है। व्यापारी 31 अक्तूबर को व्यापार समाप्ति की तिथि मानकर अब तकलाकोट से लौटने की तैयारी में हैं। व्यापारी 31 अक्तूबर की सुबह तकलाकोट से वाहन के जरिए लिपुलेख दर्रे तक आएंगे। वहां से दर्रा पारकर भारतीय सीमा में प्रवेश करेंगे।
अपर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि ट्रेड ऑफिसर व्यापारियों की मंशा के आधार पर ही इस तरह की डिमांड भेजते हैं। जिला प्रशासन व्यापार अवधि बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रालय और केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजता है। वहीं से इसकी मंजूरी मिलती है। उन्होंने बताया कि व्यापार की वर्तमान अवधि 31 अक्तूबर को समाप्त हो रही है। यदि इस बीच में अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव आता है तो उसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
उधर, तकलाकोट मंडी से मिली जानकारी के अनुसार इस बार व्यापार काफी धीमा रहने के कारण व्यापारियों में उत्साह कम है। तिब्बत की मंडी में इस समय सीमांत के 34 व्यापारी हैं। वह अपने साथ गुड़, मिश्री, काफी, रेडीमेड कपड़े, अल्युमिनियम के बर्तन जैसी सामग्री लेकर गए हैं। तिब्बत की मंडी से अब तक ऊन, तिब्बती ऊन से बने कंबल, रजाई, जूते, चंवर गाय की पूंछ जैसी सामग्री लेकर व्यापारी भारतीय क्षेत्र में लौटे हैं। तिब्बत की मंडी से व्यापारी नेता पदम सिंह रायपा, जीवन रौंकली, दीवान सिंह गर्ब्याल, दिनेश गुंज्याल, अर्चना देवी ने बताया कि वह 31 अक्तूबर की सुबह तकलाकोट मंडी से लिपुलेख दर्रे को रवाना होंगे और उसी दिन लिपुलेख दर्रा पार कर लेंगे। यदि उससे पहले व्यापार की अवधि बढ़ने की सूचना मिल जाती है तो कुछ दिन और रुका जा सकता है।