चंपावत। चंपावत जिले में कोरोना संक्रमण की सबसे ज्यादा मार मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा पर पड़ी। जिले में इस साल अप्रैल से अब तक हुई 44 मौतों में से 25 इसी इलाके के हैं। ये 25 मौतें सिर्फ 33 दिन (16 अप्रैल से 18 मई तक) में हुई। लेकिन बीते नौ दिन से मैदानी क्षेत्र में न केवल कोरोना संक्रमण पर काबू हुआ है, बल्कि कोई भी जान नहीं गई है। और ये सब हुआ टनकपुर-बनबसा में 27 अप्रैल से लगे कोविड कर्फ्यू से।
टनकपुर-बनबसा क्षेत्र अप्रैल से चंपावत जिले का सबसे हॉट स्पॉट बना हुआ था। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या से लेकर मौत का ग्राफ खासा उछाल मार रहा था। इसके चलते जिला प्रशासन ने मैदानी क्षेत्र में 27 अप्रैल से कोविड कर्फ्यू लगाया। बाद में 11 मई से पूरे प्रदेश में कर्फ्यू लगा। इस कर्फ्यू से टनकपुर-बनबसा में अब हालात नियंत्रण में हैं। बीते 19 दिन में यहां सिर्फ 249 लोग संक्रमित (संक्रमण दर 2.70 प्रतिशत) आए। जबकि इससे पूर्व 27 अप्रैल से आठ मई तक 505 लोग संक्रमित (संक्रमण दर 8.65 प्रतिशत) थी। वहीं मैदान में 16 अप्रैल से 18 मई तक 25 लोगों की संक्रमण से मौत हुई। लेकिन 18 मई के बाद एक भी कोरोना संक्रमित की जान नहीं गई।
उठाए ये कदम:
-कोरोना जांच में तेजी। इस अवधि में 19413 लोगों की जांच हुई।
-स्वास्थ्य विभाग के सचल दस्ते को गांवों में भेजकर सैंपलिंग कराना।
-अस्पताल के अलावा स्टेडियम में 50 और पर्यटक आवास गृह में 15 बैडों की सुविधा।
-नगर पालिका द्वारा सैनिटाइजेशन और सफाई के काम को बढ़ाया गया।
कोट
पूर्णागिरि तहसील में कोरोना संक्रमण पर अब काबू है। इसके लिए जिलाधिकारी द्वारा 27 अप्रैल से टनकपुर-बनबसा में लगाया गया कर्फ्यू बड़ा कारण रहा। इसके अलावा जिले के प्रवेशद्वार जगबुड़ा और सभी प्रवेश बिंदुओं पर कोरोना जांच, संक्रमितों को आइसोलेट करना, सैनिटाइजेशन में तेजी और आम लोगों के सहयोग की अहम भूमिका रही है।
हिमांशु कफल्टिया,
एसडीएम, टनकपुर।