दिल्ली से आई सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) टीम ने जिले में चल रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कामों का मुआयना शुरू कर दिया है। पांच दिवसीय दौरे पर आई यह टीम नौ नवंबर तक जिले के तमाम अस्पतालों और एनएचएम के तहत चल रहे कामों का निरीक्षण करेगी। पहले दिन टीम ने जिले की स्थिति जानने के साथ ही सिप्टी राजकीय एलोपैथिक केंद्र का मुआयना किया और लोगों से वार्ता कर उन्हें मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डा.रश्मि पंत ने टीम को जिले में चल रहे एनएचएम के कामों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में दस राजकीय एलोपैथिक केंद्र, 66 उपकेंद्र, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ को जिला अस्पताल में भेजा गया है। इसके अलावा जिला अस्पताल सुचारु रूप से काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि एनएचम के कामों को तीव्र गति से चलाने को पर्याप्त स्टाफ की तैनाती की गई है। बताया कि जिले में 309 आशा कार्यकर्ता एनएचएम के काम में सहयोग कर रही हैं। इनमें से 261 आशा कार्यकर्ता को प्रशिक्षित किया गया है। एसीएमओ डॉ.पंत ने बताया कि जिले में मिजिल्स रूबेला टीकाकरण अभियान बेहतर तरीके से चल रहा है। इसके अलावा एनएचएम के तहत चल रहे मातृ शिशु, किशोर किशोरी स्वास्थ्य, प्रसव, तमाम तरह के टीकाकरण, जननी सुरक्षा योजना और संक्रामक और गैर संक्रामक रोगों से निपटने में विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। एनएमएम के स्टेट हेड डॉ. विनोद सिंह टोलिया ने बताया कि निदेशक डॉ.आलोक कुमार वर्मा के नेतृत्व में आई टीम में अंडर सेक्रेट्री डॉ.एस नायक, डॉ.रमन एन करिअप्पा, डॉ.रवि कुमार, डॉ.हनी अरोड़ा और डॉ विनय बत्रा शामिल हैं।
जिले में उपलब्ध नहीं हैं एआरवी और पेंटा-1 के टीके
चंपावत। जिले में सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) ने एनएचएम के कामों का मुआयना शुरू जरूर कर दिया है। लेकिन जिले में पेंटा-1 के टीके उपलब्ध नहीं हैं। जिस वजह से पिछले बुधवार को टीकाकरण नहीं हो सका था। पेंटा-1 टीका पांच रोगों से बचाव के लिए लगाया जाता है।
ये टीका हेपेटाइटिस बी, एच-इंफ्लूएंजा, डिप्थीरिया, परट्यूसि व टिटनेस जैसे पांच वैक्सीन को मिला कर बना है। एसीएमओ डा.रश्मि पंत का कहना है कि सोमवार तक देहरादून से पेंटा-1 के टीके चंपावत पहुंच जाएंगे। बुधवार तक हर एएनएम सेंटर तक पेंटा-1 टीके पहुंचा दिए जाएंगे। इसके अलावा जिले में एंटी रैबीज टीके (एआरवी) की उपलब्धता भी बीते छह माह से नहीं है। जिससे लोगों को टीके बाजार से ऊंचे दामों में खरीदने पड़ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.आरके जोशी का कहना है कि जिला प्रशासन से रेडक्रास के जरिये एआरवी खरीदने की मांग की गई है।