एंटी ह्यूूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और रीड्स संस्था के प्रयास से तीन नेपाली युवतियों को गलत हाथों में पड़ने से बचा लिया गया। युवतियों के परिजनों को सूचित कर उन्हें संस्था के उज्वला पुनर्वास केंद्र में रखा गया है। युवतियों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा।
एंटी ह्यूूमन ट्रैफिकिंग सेल प्रभारी एसआई मंजू पांडेय ने बताया कि बृहस्पतिवार को संदिग्धावस्था में नेपाल की ओर से आ रही तीन युवतियों को देखकर उन्हें रोका गया। पूछताछ में युवतियों ने बताया कि वे किसी नेपाली युवक के कहने पर उसके साथ बिना घर में बताए भारत को आ रही थी। युवक उन्हें हरिद्वार में किसी कपड़े की फैक्ट्री में काम दिलाने की बात कहकर अपने साथ ले जा रहा था। वह युवतियों के आगे-पीछे चल रहा था, लेकिन जब उसकी तलाश की गई तो उसका कहीं पता नहीं चला।
संस्था के परियोजना निदेशक जनक चंद ने बताया कि दो युवतियां नेपाल के तेहरथुन और एक धनकुटा जिले की रहने वाली हैं। नेपाल पुलिस के सहयोग से उनके परिजनों से संपर्क किया गया है, उनके आने के बाद उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।