टनकपुर (चंपावत)। चंपावत वन प्रभाग के नेपाल सीमा से लगे खर्राटाक के जंगल में नेपाल से वन्यजीव शिकारियों ने फिर दस्तक देनी शुरू कर दी है। बताया गया कि एक सप्ताह पहले जंगल में डेरा जमाए शिकारियों को वन विभाग की टीम ने फायरिंग कर खदेड़ा। शिकारी भी दो फायर कर नेपाल को भाग निकले।
ठंड शुरू होने के साथ ही हर साल नेपाल सीमा से लगे खर्राटाक के जंगल में नेपाल से वन्यजीव शिकारी डेरा जमाने लगते हैं। सीमा पर छह किमी अंतराल में एसएसबी की दो बीओपी पोस्ट हैं, लेकिन शिकारी मौका देखकर इस दोनों बीओपी के बीच से शारदा पार कर जंगल में घुस आते हैं। इन दिनों शिकारी गिरोह जंगल में फिर दस्तक देने लगा है।
सूत्रों के मुताबिक 24 अक्तूबर को जंगल में गश्त पर गई वन विभाग की टीम का शिकारियों से सामना हो गया। इससे पहले कि वन कर्मी उन्हें दबोच पाते वे मौका पाकर भाग खड़े हुए। वन कर्मियों ने तीन फायर कर उन्हें रुकने को कहा, लेकिन शिकारी भागते-भागते दो फायर कर नेपाल की ओर निकल गए। बूम रेंज के वन दरोगा गजेंद्र राम कोहली ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जंगल में शिकारियों के आने की सूचना पर भी विभाग की टीम गश्त पर गई थी। टीम को देख जब शिकारी भागने लगे तो उन्हें रोकने के प्रयास में तीन फायर करने पड़े।
इधर, खर्राटाक से लगे एक गांव के व्यक्ति ने बताया कि सीमा से लगे खर्राटाक के जंगल में आकर नेपाल के शिकारी अक्सर वन्यजीवों को शिकार करते हैं।
ग्रामीणों ने उठाई सड़क निर्माण की मांग
टनकपुर। खर्राटाक के जंगल से लगे कोटकेंद्री गांव के ग्रामीणों ने निर्माणाधीन श्यामलाताल-पोथ मार्ग को कोटकेंद्र समेत अन्य गांवों से होते हुए चूका से जोड़ने की मांग उठाई है। ग्रामीण ललित सिंह के अलावा मां पूर्णागिरि मंदिर समिति अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय, नेत्र बल्लभ तिवारी, मंदिर समिति पूर्व अध्यक्ष किशन तिवारी, राजू तिवारी, शंकर तिवारी, मोहन चंद्र पांडेय आदि का कहना है कि सड़क सुविधा से न सिर्फ गांवों का विकास होगा, बल्कि वन्यजीवों के शिकार और सीमा पार से होने वाली अवैधानिक गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा।