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कोरोना परीक्षण आज, बगवाल मेला कल

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मां बाराही धाम देवीधुरा में महाशक्तिपीठ पूजन करते पुरोहित। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा में 22 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन बगवाल होगी। इससे पहले शनिवार को देवीधुरा में कोरोना परीक्षण किया जाएगा। इस साल लगातार दूसरी बार सांकेतिक रूप से बगवाल होगी। कोविड निर्देशों के अनुरूप इस बगवाल में अधिकतम 75 लोग हिस्सा ले सकेंगे। इसके लिए प्रशासन ने कार्यनीति तय की है। यहां तक कि मंदिर समिति ने किसी को भी अतिथि के रूप में न्योता नहीं दिया है। खुद डीएम और एसपी भी बगवाल में हिस्सा नहीं लेंगे।
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डीएम विनीत तोमर का कहना है किसी भी रूप में कोरोना के निर्देशों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा। बगवाल में शिरकत करने वाले प्रतिनिधियों को कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य रूप से साथ लानी होगी। चंपावत के एसडीएम अनिल गर्ब्याल को मेला मजिस्ट्रेट, जिला पंचायत के अपर मुख्याधिकारी राजेश कुमार मेलाधिकारी और सीओ अशोक कुमार सिंह को मेले की व्यवस्था और सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। आम दर्शकों के अलावा राजनीतिक प्रतिनिधियों से भी बगवाल में न जाने की अपील की गई है।
महाशक्तिपीठ गोबड़ी में हुई पूजा-अर्चना
पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा के महाशक्तिपीठ गबोड़ी में पूजा-अर्चना हुई। शुक्रवार को कोरोना निर्देशों का पालन कर धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। पूजन में चारों खामों और सातों तोकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ और धर्मानंद ने गणेश पूजन, गौरी, भीम शिला, भैरव, महाकाली, कलवा, मां बाराही देवी की पूजा कराई। इससे पूर्व सभी प्रतिनिधियों ने मंदिर की परिक्रमा की।
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पूजन में लमगड़िया खाम के वीरेंद्र सिंह लमगड़िया, वालिग खाम के बद्री सिंह, दीवान सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह और गहड़वाल खाम के बद्री सिंह, खुशाल सिंह, त्रिलोक सिंह, पान सिंह, माधो सिंह बिष्ट, शिव सिंह चौहान, लाल सिंह चम्याल शामिल थे। संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने वैदिक मंत्रों से मां भगवती की अर्चना कर देवी पाठ किया।
भीम शिला से है पांडवों का जुड़ाव
पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा की भीम शिला का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है। इसे लेकर कई मान्यताएं भी हैं। मां बाराही धाम के पीठाचार्य कीर्तिबल्लभ शास्त्री का मानना है कि पांडवों के यहां आने से पूर्व मां बाराही की स्थापना इस स्थान पर हो चुकी होगी। मान्यता रही है कि किसी क्षेत्र में कोई एक देवी-देवता स्थापित है तो वहां उसी की प्रधानता रहती है। भीम शिला एक विशालकाय शिला है। इस शिला पर प्रमाण चिह्नित है कि अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां वास किया होगा। वह इस शिला के ऊपर चौपड़ खेलते होंगे क्योंकि शिला पर चौपड़ के लिए चौकियां बनीं हैं।
मान्यता के अनुसार जब पांडव इस शिला के ऊपर चौपड़ खेल रहे थे। तब उनके साथ शक्ति स्वरूपी मां बाराही एक ग्वालन के रूप में बैठी थी। इसी बीच किसी बात पर भीम को क्रोध आया और ग्वालन इस शिला के भीतर समा गई। भीम ने ग्वालन की तलाश में इस शिला के दो हिस्से कर दिए, लेकिन वह भूल गए कि उनके सभी भाई शिला के ऊपर बैठे चौपड़ खेल रहे हैं। उसी समय शिला दो भागों में विभक्त होकर गिरने लगी थी। भीम ने पास में रखी एक छोटी शिला को विभक्त करने वाले जोड़ पर रख दिया, जिसके शिला गिरने से बच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी शिला पर भीम के हाथ, पंजों और तलवार से विभक्त किए गए निशान दिखते हैं। इस शिला के एक भाग को थपथपाने पर ऐसा लगता है कि यह खोखली है। संवाद
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