पंचेश्वर के प्रस्तावित बांध में डूब क्षेत्र में आने वाले सीमावर्ती गांवों के लोगों में असमंजस बना हुआ है। डूब क्षेत्र में कौन-कौन से गांव आएंगे? इस असमंजस की स्थिति को देखते हुए लोग अपने गांवों में निर्माण कार्य करने में कतरा रहे हैं। सीमावर्ती मडलक क्षेत्र के बगोटी, जमरसों और लेटी गांवों के ग्रामीणों में पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों की स्थिति साफ करने की मांग की है।
ग्राम पंचायत बगोटी के ग्रामीणों ने पंचेश्वर बांध के दायरे में आने वाले गांवों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इससे ग्रामीणों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। इस अनिश्चितता के चलते लोग आवास या शौचालयों आदि का निर्माण कार्य कराने में कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव के आंशिक विस्थापन के खिलाफ हैं क्योंकि ग्रामीण के सुख-दुख एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में गांवों के संबंध में जो भी निर्णय हो, वे पूरी तरह से लागू हों। ग्रामीणों ने यहां के लोगों के एक ही स्थान पर सामूहिक विस्थापन की मांग की। बैठक में ग्रामीणों ने विस्थापन की आंशका पर चिंता जताई। सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के संरक्षण की मांग भी की है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभिन्न स्रोतों से मिली खबरों से यह बात सामने आई है कि पंचेश्वर बांध बनने से लोहाघाट विकासखंड के बगोटी, जमरसों, डुंगरालेटी, पासम और अषलाड़ गांवों के प्रभावित होने के अंदेशे हैं। ऐसे में यहां के ग्रामीण विस्थापन की आशंका से ग्रस्त होकर असमंजस में हैं। बैठक में पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरीश चंद्र पांडेय, यशोधर पांडेय, अनिल पांडेय, डा.सतीश पांडेय, दीनानाथ, जगदीश चंद्र, प्रवीण पधान, ललित मोहन, चंद्र राम, पूरन चंद्र, शीश राम, मथुरा दत्त, लक्ष्मण सिंह, कमल जोशी, दिवान पुजारी, भुवन चंद्र, कमल किशोर, मनोहर राम, परमानंद पांडेय, धर्मानंद, पीतांबर, डिकर सिंह, नारायण दत्त, रुद्र सिंह आदि शामिल थे।