लंबे समय से खून के लिए तरस रहे मरीजों की परेशानी खत्म होने जा रही है। चंपावत का ब्लड स्टोरेज यूनिट सोमवार से शुरू हो जाएगा। इसके लिए रविवार को पिथौरागढ़ से14 यूनिट खून पहुंच गया है। चंपावत में खून की कमी से हर साल करीब 11 मौतें हो जाती है।
डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने 24 मई को जिला अस्पताल का औचक मुआयना करने के बाद एक सप्ताह के भीतर ब्लड स्टोरेज यूनिट को शुरू करने की हिदायत दी थी। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। चंपावत में 2012 में ब्लड बैंक भवन बना था, लेकिन संचालन नहीं हो सका। ब्लड बैंक की प्रक्रिया पूरी होने तक यहां ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू हो जाएगा। ब्लड स्टोरेज यूनिट की मदर यूनिट पिथौरागढ़ ब्लड बैंक ने हल्द्वानी की ब्लड ट्रासंफर वैन से रविवार को 14 यूनिट खून भेजा।
पिथौरागढ़ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ.एनके शर्मा ने बताया कि एचआईवी, हिपेटाइटिस सहित विभिन्न जांच कर ए व बी ग्रुप की चार-चार और एबी व ओ ग्रुप की तीन-तीन यूनिट खून के बैग चंपावत ब्लड स्टोरेज को भेज दिया है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि खून को ब्लड स्टोरेज यूनिट में रख दिया गया है। सोमवार से ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू हो जाएगा।
एक साल से चल रही थी ब्लड स्टोरेज यूनिट की कवायद
पिछले साल 8 जून को खून की कमी से पवैत गांव की एक प्रसूता दीपा पांडेय की शिशु को जन्म देने के बाद मौत हो गई थी। खून की कमी से हुई इस मौत के बाद लोगों में कई दिनों तक उबाल रहा। तब ब्लड बैंक की प्रक्रिया को तेज करने के अलावा ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू करने की कवायद हुई। देहरादून से नोडल अधिकारी यहां पहुंचे और विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून को इसे शुरू करने का दावा किया गया। मगर ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू नहीं हो सकी। मार्च और अप्रैल में भी इसे शुरू करने की बात कही गई, लेकिन ये मामला लटका रहा। और अब डीएम के हस्तक्षेप के बाद इसे सोमवार से शुरू किया जा रहा है।
खून के लिए नहीं लगानी पड़ेगी 75 किमी की दौड़
चंपावत जिले के पहाड़ी हिस्से के लोग खून पाने के लिए इधर-उधर भटकते थे। पहाड़ के लोगों को 75 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ और मैदानी हिस्से टनकपुर-बनबसा के लोग करीब 85 किमी की दौड़ लगाते हैं। जिले के करीब 430 लोगों को सालभर में रक्त की जरूरत पड़ती है। सिर्फ खून के लिए वाहन लेकर एक शख्स को औसतन 2500 रुपये आवाजाही में ही खर्च करने पड़ते हैं। सालभर में यहां के लोगों को 10.75 लाख रुपये खर्च करने को मजबूर होना पड़ता रहा है। अगर ब्लड स्टोरेज यूनिट ने ठीक से काम किया, तो लोगों को इस बेवजह के खर्चे और परेशानी से निजात मिल सकेगी।