परिवहन विभाग की ओर से की जा रही चालान की कार्रवाई से गुस्साए ई-रिक्शा चालकों ने शनिवार को रिक्शों का संचालन ठप रख प्रदर्शन किया। उन्होंने विभाग पर रिक्शा चालकों को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है।
निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष विपिन कुमार वर्मा और पूर्व पालिकाध्यक्ष हर्षवर्धन रावत ने रिक्शा चालकों के आंदोलन का समर्थन किया। तय हुआ है कि 15 अगस्त के बाद एसडीएम की अध्यक्षता में परिवहन के अधिकारियों से वार्ता कर रिक्शा चालकों की परेशानी का हल निकाला जाएगा। इधर ई-रिक्शों का संचालन बंद रहने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
आंदोलन में पूर्व घोषित रणनीति के तहत शनिवार को ई-रिक्शा चालकों ने सुबह से ही रिक्शों का संचालन बंद रखा। ई-रिक्शा यूनियन अध्यक्ष मनोज गड़कोटी के नेतृत्व में रिक्शा चालकों ने पीलीभीत चुंगी पर परिवहन विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि रिक्शा चालक दस किमी. के क्षेत्रफल में सवारी ढोकर परिवार की आजीविका चला रहे हैं।
पूर्व में ई-रिक्शों का परिवहन विभाग में पंजीकरण नहीं होता था और एजेंसी द्वारा भी रिक्शा के कोई कागजात नहीं दिए गए थे लेकिन अब परिवहन विभाग पंजीकरण कराने को कहा रहा है। ऐसी स्थिति में पहले एजेंसी स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ई-रिक्शों का फिटनेस शुल्क बड़े वाहनों के बराबर वसूला जा रहा है जो गरीब रिक्शा चालक पर ज्यादा आर्थिक बोझ है।
प्रदर्शन में संजय कुमार, देव कुमार, रसीद अहमद, रईस, यशवंत सिंह, प्रीतम लाल, नवीन गहतोड़ी, मुना लाल, अशोक कुमार, मो. यार खां, प्यारे लाल, नरेंद्र बोहरा, वेदप्रकाश, राहुल कश्यप, मुनब्बर अली, विक्रम नाथ, रवी चिलकोटी, माधो राम, छाटे लाल, सुभम जुकरिया, कमलेश कुमार, तेजपाल, देव दत्त पांडेेय, राम अवतार, अमित मैसी समेत काफी संख्या में रिक्शा चालक शामिल थे।
ये हैं ई-रिक्शा चालकों की मांग
-फिटनेश शुल्क कम किया जाए और पेनाल्टी खत्म की जाए।
-स्कूल के बच्चों को बैठाने की छूट दी जाए।
-रिक्शों के पंजीकरण के लिए दिए गए समय में परिवहन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई न की जाए।
-ई-रिक्शों को मोटर यान अधिनियम से बाहर कर नगर पालिका के अधीन चलाया जाए।