यहां से 9 किमी दूर फुलवाड़ी गांव के मैथोडिस्ट चर्च की नक्काशी बेहतरीन वास्तुकला का नमूना है। लकड़ी से बने इस चर्च में शानदार नक्काशी की गई है। मैथोडिस्ट ईसाई टीचिंग, हीलिंग और प्रीचिंग (शिक्षा, स्वास्थ्य और उपदेश) को विशेष तवज्जो देते हैं। इस चर्च की नींव 1931 में अंग्रेज महिला मिस एनी न्यूटन बटन ने रखी। तबसे यह चर्च ईसाईयों की आस्था का केंद्र बना है।
पास्टर सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि 1880 में मिस बटन ने कई परिवारों को ईसाई बनने की प्रेरणा दी। ईसाईयों की आस्था के इस केंद्र में क्रिसमस और उसकी पूर्व संध्या पर कई कार्यक्रम होते हैं। क्रिसमस से पूर्व देर रात तक धूमधाम से प्रभु यीशु का जन्मदिन मनाने के साथ विशेष प्रार्थना होगी। 25 दिसंबर को ईसाईयों के साथ ही अन्य धर्मों के लोग भी क्रिसमस के दिन चर्च पहुंचेंगे।
क्रिसमस पर प्रार्थना के अलावा कई खास कार्यक्रम होंगे। चर्च को विशेष रूप से सजाया गया है। 151 की आबादी वाला यह समाज क्रिसमस की तैयारियों में जुटा है।
सेंटा क्लॉज ने बांटे उपहार
टनकपुर (चंपावत)। क्रिसमस डे को लेकर तैयारी जोरों पर है। मैथोडिस्ट चर्च को बिजली से सजाया गया है। पादरी ईएम पॉल ने बताया कि ये चर्च 1984 में बना है। सेंटा क्लॉज बने एडविन ने लोगों को उपहार व मिठाई बांटी। क्रिसमस कैरोल के रूप में तेरी आराधना करूं और गिव मी ऑयल इन माई लैंप गीत पेश किए गए।
पत्नी की याद में एबट की ओर से बनाया गया एबटमाउंट चर्च अब खामोशी में
लोहाघाट (चंपावत)। आठ किमी दूर एबटमाउंट स्थित क्षेत्र का एकमात्र चर्च अब भले ही खामोशी के आगोश में है लेकिन ब्रिटिश काल में यह हर वक्त गुलजार रहता था। प्रकृति प्रेमी हैराल्ड एबट ने 1910 में यहां भूमि लीज पर लेने के बाद अन्य अंग्रेजों को बसाने का काम किया था। तब यहां अंग्रेजों की खूब आवाजाही होती थी।
मैथोडिस्ट चर्च के पास्टर सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि एबट ने 1930 में अपनी पत्नी की याद में चर्च का निर्माण किया था। उस वक्त यहां रोजाना प्रार्थना हुआ करती थी लेकिन आजादी मिलने के बाद यहां अंग्रेजों की आवाजाही कम हो गई। आज स्थिति यह है कि इस 89 साल पुराने इस चर्च में क्रिसमस डे के दिन भी सुनसानी छाई रहती है।
टनकपुर में क्रिसमस डे पर बने सेंटाक्लॉज और अन्य सजेधजे बच्चे।- फोटो : CHAMPAWAT
क्रिसमस की पूर्व संध्या पर रोशनी से सजा टनकपुर का चर्च।- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत का चर्च।- फोटो : CHAMPAWAT