चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणपत्र मिला है। भारत सरकार में अपर सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक रोली सिंह ने इस आशय का पत्र जारी किया है।
जिला अस्पताल के पीएमएस डॉॅ. एचएस ऐरी ने बताया कि अस्पताल को पांच विभाग में यह प्रमाणपत्र दिया गया है जबकि एक अन्य विभाग को कुछ शर्तों के साथ प्रमाणपत्र दिया गया है। चंपावत जिला उत्तराखंड में पहला पर्वतीय जिला बन गया है, जिसे एनक्यूएएस प्रमाणपत्र मिला है।
अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए पिछले साल के अंत में आई टीम की संस्तुति के बाद यह प्रमाणपत्र जारी किया गया है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि इस प्रमाणपत्र के मिलने के बाद अस्पताल को तीन साल तक प्रति बेड दस हजार रुपये सालाना की प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। इस रकम का उपयोग जिला अस्पताल में और बेहतर इलाज के लिए किया जाएगा।
इन विभागों को मिला है प्रमाणपत्र
ओपीडी (वाह्य रोग विभाग), ब्लड बैंक, मातृत्व रोगी कक्ष, औषधी और सामन्य प्रशासन विभाग।
इसके अलावा लेबर रूम को कुछ शर्तोंं के साथ।
अब सीएचीओ के जरिये खुलेंगे आईसीयू के ताले
चंपावत। 11 महीने से अधिक समय बाद फिर से चंपावत के सघन निगरानी इकाई (आईसीयू) के दरवाजे खुल जाएंगे। जिला अस्पताल के आईसीयू के संचालन के डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी के निर्देश के बाद चार सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) को संबद्ध करने का निर्णय लिया गया। अब संबद्धीकरण के आदेश जारी कर दिए गए हैं। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि 15 फरवरी से आईसीयू का संचालन शुरू हो जाएगा।
ढाई साल पूर्व जिला अस्पताल में आईसीयू खुला। पांच जून 2021 से तीन मार्च 2022 तक 180 रोगियों का आईसीयू में इलाज हुआ। बाद में सीएचओ को एनएचएम में भेजने से पिछले साल चार मार्च से आईसीयू में ताला लटक गया। तबसे ये इकाई बंद है। अब फिर से सीएचओ को संबद्ध करने के आदेश के बाद 15 फरवरी से आईसीयू शुरू हो जाएगा।
डेढ़ साल पूर्व डीएम के आदेश से शुरू हुआ था आईसीयू
चंपावत। जिला अस्पताल के आईसीयू के लिए स्टाफ नर्स की कमी आज तक दूर नहीं हो सकी है लेकिन स्टाफ की कमी के बावजूद आईसीयू का जून 2021 से मार्च 2022 तक संचालन तत्कालीन डीएम विनीत तोमर के एक आदेश से हुआ। तब डीएम ने आईसीयू की जरूरत वाले मरीज का इलाज अनिवार्य रूप से आईसीयू में ही करने के आदेश देते हुए आईसीयू की सुविधा नहीं मिलने से किसी मरीज की मौत होने पर अस्पताल की जिम्मेदारी तय कर दी थी। आदेश की अवहेलना पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, महामारी अधिनियम और आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।