चंपावत जिला मुख्यालय में स्थित डिप्टेश्वर झील का प्रस्तावित स्थल।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। श्यामलाताल से पहचान बनाने वाला चंपावत जिला अगले कुछ सालों में झील नगरी के रूप में पहचान बनाएगा। निर्माणाधीन कोलीढेक झील के बाद अब डिप्टेश्वर झील भी कुछ वर्षों में अस्तित्व में आएगी। इसे लेकर अब डूब क्षेत्र के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिले में झीलों की बढ़ोतरी से सिंचाई, पेयजल, पर्यटन के विस्तार के साथ ही रोजगार और स्वरोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
नेपाल सीमा से लगे चंपावत में एक कुदरती ताल (श्यामलाताल) पहले से ही है। 30 करोड़ रुपये से कोलीढेक झील बीते दो साल से निर्माणाधीन है। सिंचाई विभाग का कहना है कि इस साल इसके पूरा होने की उम्मीद है। अब चंपावत में डिप्टेश्वर के पास झील के सर्वे और अन्य बुनियादी कार्यों के बाद डूब क्षेत्र के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सिंचाई विभाग के एई लक्ष्मण कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के एलान के बाद अब तक सर्वे और अन्य कार्यों के लिए 20.53 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। झील की डीपीआर (विस्तृत प्रगति रिपोर्ट) के लिए 63.45 लाख रुपये की मांग उच्चाधिकारियों से की गई है। बजट मिलने के बाद डीपीआर निर्माण का काम किया जाएगा।
नौ करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली करीब 400 मीटर लंबी, 60 मीटर चौड़ी और 13 मीटर ऊंची इस झील के संभावित डूब क्षेत्र पर मंत्रणा और सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नगर क्षेत्र से पांच किमी दूर इस झील में खेती वाली जमीन के अलावा कुछ मकानों के डूब क्षेत्र में आने की संभावना है। इसे लेकर विभाग 11 जनवरी को झील के आसपास के लोगों से मंत्रणा करेगा।
1.03 करोड़ से पूरा हुआ गौड़ी नदी के संरक्षण का काम
चंपावत में गौड़ी नदी के संरक्षण और संवर्द्धन की परियोजना को भी पूरा कर लिया गया है। पिछले साल पूरी हुई इस योजना का एलान 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। सिंचाई विभाग के ईई सुरेश रावत ने बताया कि 1.03 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना के तहत गौड़ी नदी के संरक्षण का काम किया गया है। नदी को साफ-सुथरा करने के साथ ही तटबंध बनाकर सिंचाई के लिए भी पानी मिल रहा है।
श्यामलाताल झील संरक्षण को भेजा 10.60 करोड़ का प्रस्ताव
चंपावत से 55 किमी दूर श्यामलाताल झील के संरक्षण और संवर्द्धन की भी पहल की गई है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन और सिंचाई विभाग पहल कर रहे हैं। सिंचाई विभाग की ओर से पिछले साल जुलाई में 10.60 करोड़ रुपये का आगणन पर्यटन विभाग को भेजा गया है।