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विदेशियों को जेल भेजा

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सुरक्षित नही है बनबसा बार्डर पर इमिग्रेशन चैकपोस्ट। - फोटो : TANAKPUR
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तीन दिन पहले इमिग्रेशन चेकपोस्ट पर पकड़े गए चार चीनी नागरिक और उन्हें मदद देने वाले तिब्बती नागरिक को पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, जहां से पांचों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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मामले की जांच शारदा बैराज चौकी प्रभारी एसआई गोविंद सिंह बिष्ट को सौंपी गई है। देर रात तक दिल्ली से आए विशेषज्ञों की टीम ने उनसे सघन पूछताछ की। सूत्रों की माने तो पूछताछ में कई अहम जानकारी पता चली है। चीनी नागरिकों की मुंबई में सोने की तस्करी में लिप्तता के प्रमाण मिले हैं।
तीन दिन पहले दिल्ली से काठमांडू जाने वाली बस में चार चीनी नागरिकों को बिना पासपोर्ट, वीजा के और दिल्ली में बनी फर्जी आईडी के साथ पकड़ा गया था। भाषा की समस्या के चलतेे पूछताछ में दिक्कतें होने के साथ उनकी नागरिकता का पता नहीं चल पा रहा था। इसलिए दिल्ली से एक्सपर्ट बुलाए गए थे। एक्सपर्ट टीम ने पांचों विदेशी नागरिकों से सघन पूछताछ की।
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उनके बैग में छुपाकर रखी एक छोटी से चिप इमिग्रेशन अधिकारी इंद्र सिंह को मिली। चिप के आधार पर उनके चीनी नागरिक होने का खुलासा हुआ। चिप में चीनी नागरिकों के पासपोर्ट की जानकारी मिली। उनके वास्तविक नाम, पते की जानकारी मिली। चिप में ही चीनी नागरिक जिनचांग ल्याओ, हाइपिन नी, सुन्जेन वैंग और वैंग ग्वेंग कैन पर डीआरआई (डायरेक्टर आफ रेवेंन्यू इंटेलिजेंस) का तस्करी में लिप्तता का नोटिस भी मिला। सीओ बीसी पंत ने बताया कि चिप में डीआरआई ने उक्त चारों चीनी नागरिकों समेत 13 कंपनियों को सोने और चांदी की तस्करी में लिप्तता के तहत जारी नोटिस की जानकारी भी मिली है।
पकड़े गए चारों चीनी नागरिक 6.70 करोड़ रुपये के सोने और 13.21 करोड़ की चांदी की तस्करी के आरोप में पकड़े गए थे। चार चीनी नागरिकों पर आईपीसी की धारा 420, 467/468/471/120 बी के अलावा 14 विदेशी अधिनियम एवं तीन पासपोर्ट एक्ट में मुकदमा दायर किया गया है। जबकि उनकी फर्जी आईडी बनाने और गलत तरीके से नेपाल पहुंचाने में मदद देने वाले तिब्बती नागरिक केत्से संग्याल पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 420//467/468/471/120 बी में मुकदमा दर्ज गया है। रविवार को न्यायालय में पेश किया गया जहां से पांच विदेशी नागरिकों को 14 दिन की रिमांड में लोहाघाट जेल भेज दिया है।
इमिग्रेशन पर और पुख्ता करने होंगे सुरक्षा इंतजाम
बनबसा (चंपावत)। भारत-नेपाल के बीच विदेशी नागरिकों की आवाजाही के लिए उत्तराखंड में केवल बनबसा ही एकमात्र वैधानिक मार्ग है, जहां राज्य का एकमात्र इमिग्रेशन चेकपोस्ट स्थापित है। इस सीमा पर सुरक्षा के और कड़े इंतजाम करने होंगे। क्योंकि चोरी छुपे भारत-नेपाल के बीच आवागमन करने का प्रयास करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए खुली सीमा एकदम मुफीद है। हालांकि इस सीमा पर तिब्बती नागरिकों को नेपाल से भारत आने की मनाही है, उन्हें वापस (पुशबैक) करने के निर्देश हैं।
भारत-नेपाल के बीच पर्यटकों की आवाजाही के लिए बनबसा में स्थापित इमिग्रेशन चेकपोस्ट का संचालन उत्तराखंड पुलिस (एलआईयू) करती है। इमिग्रेशन चेकपोस्ट आफीसर (सीपीओ) इंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष भर में करीब सवा सौ देशों के साढ़े तीन से चार हजार विदेशी पर्यटक इस सीमा से आवागमन करते हैं। इस खुली सीमा पर स्थित इमिग्रेशन चेकपोस्ट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसके अलावा भारत-नेपाल यात्री बसें भी सुरक्षा के लिए चुनौती की तरह हैं।
दरअसल, 12 जुलाई को नेपाल से गैरकानूनी तौर पर नेपाली यात्री बस में सवार होकर फरीदा नामक पाकिस्तान मूल की अमेरिकी नागरिक भारत में प्रवेश करते समय पकड़ी गई थी। इसके बाद चीनी नागरिक समेत पांचों विदेशी नागरिक भी इसी बस में सवार होकर नेपाल जाने की फिराक में थे, जिन्हें चेकपोस्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा था।
ये दोनों घटनाएं नेपाली यात्री और मैत्री बसों से संदिग्धों के भारत-नेपाल सीमा पार करने की आशंका को और बढ़ाती हैं। ऐसे में इमिग्रेशन चेकपोस्ट पर सुरक्षा और कड़ी करने की ओर ध्यान देने की जरूरत है।
कई विदेशी पकड़े गए हैं बनबसा इमिग्रेशन चेकपोस्ट में
बनबसा (चंपावत)। भारत-नेपाल के बीच फर्जी तरीकों से आवागमन करने के प्रयास में वर्ष 1996 जसवीर सिंह, 27 जनवरी 2008 में नाइजीरिया निवासी डूबे कालिमस, 3 अप्रैल 2010 को सोमालिया निवासी जोडा नाईल एवं राइकी शान, 30 अप्रैल 2012 को पुलिस के वांडेड आरोपी अवतार सिंह, 13 मार्च 2013 को अमेरिकन नागरिक केटर माइकल लोवेल, 20 सितंबर 2013 को मास्को रूस निवासी कौस्टांटिन पैत्रोव, 23 अगस्त 2014 को रूसी नागरिक मिखाईल ग्लूखोव, 18 नवंबर 2014 को सूडानी नागरिक मुस्तफा मोअवीआ मोहम्मद, 30 अप्रैल 2019 को इजरायली नागरिक यानिव बेनिम और 12 जुलाई 2019 को पाक मूल निवासी अमेरिकन फरीदा को पकड़ा गया है। ब्यूरो

जेल पहुंचे चीनी और तिब्बती नागरिक।- फोटो : TANAKPUR

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