पुलहिंडोला में पेयजल के लिए हाहाकार शुरू हो गया है। स्थानीय लोग तीन किमी दूर चरनौला गधेरे से पानी ढोने को मजबूर हैं। इस स्थान में मनुष्य और मवेशी एक घाट से पानी पी रहे हैं।
पुलहिंडोला में वर्ष 2000 से पहले जैसी स्थिति पैदा हो गई है। यहां महिलाओं को लंबी दूरी पैदल तय कर पानी ढोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यहां के पांच हैंडपंपों में केवल एक हैंडपंप चल रहा है। लगातार चलने से इकलौते हैंड पंप का जल स्तर भी जवाब दे गया है। शेष हैंडपंपों का जल स्तर रसातल में पहुंचने से यह बेकार हो गए हैं। जल संस्थान नेे हाल ही में यहां नया हैंडपंप लगाया है, लेकिन उसे चालू नहीं किया गया है।
जल निगम ने यहां मिनी ट्यूबवेल लगाकर उससे तीन सौ एलपीएम पानी निकालने का प्रदर्शन किया। उसके बाद इस योजना को बीच में ही छोड़ दिया। जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि विभाग की विद्युत यांत्रिक डिवीजन नू प्रारंभिक कार्य कर लिया है। अब उसमें सिविल वर्क होना है। बजट मिलने की स्थिति में लगभग आठ माह का समय और लगेगा। सामाजिक कार्यकर्ता शिवराज अधिकारी, लक्ष्मण भंडारी, गिरीश तिवारी, हरीश पंत, नवीन पंत, महिला समाख्या की मीनू पंत का कहना है कि यदि ट्यूबवेल का युद्ध स्तर पर निर्माण कर चालू नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।