दिगालीचौड में ब्रहमदेवता के डोले को मंदिर की ओर ले जाते श्रद्घालु।
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दिगालीचौड़ में तीन दिनी हरेला महोत्सव का देवडांगरों के रथ के मंदिर की परिक्रमा के बाद समापन हो गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने ब्रह्मदेव मंदिर में शीश नवाया और लोगों ने पर्यावरण के संरक्षण के लिए पौधरोपण किया। शनिवार को समापन के दिन बिंडातिवारी गांव में ब्रह्मदेवता के रूप में अवतरित डांगर विद्याधर तिवारी श्रद्धालुओं के साथ खाली रथ के साथ जवानी गढ़ के बाद ढुंगाबोरा तक गए, जहां पर हुल्का देवी का मायका बताया जाता है।
ब्रह्मदेव के शृृंगार करने के बाद भक्त डांगर को कंधे में लेकर जवानी गढ़ तक लाए, जिसके बाद रथ में सवार ब्रह्मदेवता ने गण और श्रद्धालुओं के साथ ढाई किलोमीटर सीधी चढ़ाई के बाद ब्रह्मदेव मंदिर में आए, जहां देवता ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालु उत्साह में थे।
इसके बाद ब्यानधुरा देवता के डांगर दीवान सिंह और सिद्ध बाबा के डांगर नवीन चंद्र उप्रेती ने भी डांगर के रूप के आशीर्वाद दिया। हरिदत्त तिवारी ने रथ पर सवार होकर ब्रह्मदेव मंदिर पहुंचने के बाद परिक्रमा की। महोत्सव में राजेंद्र सिंह बिष्ट ने भंडारे का आयोजन किया। मेले में जल संस्थान और प्रशासन ने सहयोग किया।
महोत्सव का संचालन मोनू बिष्ट ने किया। कमेटी ने शांति व्यवस्था के लिए प्रशासन का आभार जताया। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य पुष्कर बोहरा, हरि सिंह अधिकारी, केशव अधिकारी, पूरन चंद, बबलू तिवारी आदि मौजूद थे।