चंपावत। कोरोना के कारण करीब दो साल के अंतराल में फिर से स्कूल खुलने से जहां स्कूलों में चहल-पहल और रौनक बढ़ गई है। वहीं नए शिक्षा सत्र में फीस, स्कूल ड्रेस से लेकर कॉपी-किताब तक महंगी हो गई है।
पिछले वर्ष की तुलना में स्टेशनरी के सामान में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। इसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है। हालांकि अभी नया शिक्षा सत्र शुरू हुए महज चार दिन ही हुए हैं। इसलिए सरकारी और निजी स्कूलों की ओर से निर्धारित फीस के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई लेकिन इस बार स्टेशनरी से जुड़े हर सामान के महंगा होने के कारण अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशनरी की दुकानों में दो साल में कॉपी-किताब से लेकर बस्ते आदि सभी सामान काफी महंगे हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि पूर्व में ऑनलाइन पढ़ाई के कारण स्कूलों ने फीस जरूर कम ली थी लेकिन एक बार फिर से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद स्कूलों की फीस बढ़ना लाजमी है।
40 फीसदी तक बढ़ गए कॉपी और रजिस्टर के दाम
चंपावत। दो साल में स्टेशनरी की दुकानों में कॉपी और रजिस्टर के दाम 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं। पहले 40 रुपये में मिलने वाली 172 पेज की कॉपी अब 60 रुपये में मिल रही है। 50 रुपये में मिलने वाली 192 पेज की कॉपी अब 70 रुपये और 60 रुपये में मिलने वाली 250 पेज वाली कॉपी 90 रुपये में मिल रही है। पेंशन बॉक्स, रजिस्टर, ड्रेस, बस्ते के दामों में काफी उछाल आया है।
नए शिक्षा सत्र में बच्चों के स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन बढ़ती महंगाई का असर सब पर पड़ रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में कॉपी- किताबों के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं। - मुकुल ढेक, अभिभावक, चंपावत।
महंगाई के कारण आम लोगों का जीना मुश्किल हो रखा है। उस पर बच्चों के स्कूल में दाखिले पर महंगाई का साया पड़ गया है। बच्चों की कॉपी-किताबों समेत फीस में भी बढ़ोतरी होना तय है। - विजेता राणा, अभिभावक, चंपावत।
बच्चों की ड्रेस और स्टेशनरी की कीमतों में बढ़ोतरी से अभिभावकों का बजट गड़बड़ा रहा है। बाजार में किसी भी प्रकाशक या पुस्तक विक्रेताओं ने रियायती दरों पर कॉपी-किताबें उपलब्ध नहीं कराई हैं। - रेनू मेहता, अभिभावक, चंपावत।
दो साल में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर भले ही स्कूलों ने कम फीस वसूली है लेकिन एक बार फिर से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के कारण फीस में बढ़ोतरी होगी। इसे झेलना अभिभावकों के लिए भारी पड़ेगा। - शंकर शर्मा, अभिभावक, चंपावत।