पांच माह से शारदा बैराज पर चला आ रहा रेड अलर्ट शुक्रवार से हटा दिया गया है। अब बैराज गेट समय पर आवाजाही के लिए नियमित रूप से खुलेगा। अंग्रेज हुकमरानों के समय से शारदा का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से अधिक होते ही बैराज से वाहनों का संचालन बंद किए जाने का नियम है। रेड अलर्ट हटने से कर्मियों के अलावा लोगों को अगले आठ माह राहत रहेगी।
शुक्रवार यानी 16 अक्तूबर से शारदा बैराज का रेड अलर्ट हटा लिया गया। शारदा हेडवर्क्स (यूपी सिंचाई विभाग) के प्रभारी एसडीओ बीएस यादव ने बताया कि शारदा बैराज पर 15 जून से 15 अक्तूबर तक रेड अलर्ट की व्यवस्था ब्रिटिशकाल से है। इस दौरान फ्लड की संभावना के तहत अंग्रेज अधिकारियों ने इस व्यवस्था को लागू किया था जो आज भी कायम है।
इस दौरान शारदा हेडवर्क्स का पूरा महकमा सतर्क रहने के साथ ही चौबीसों घंटे नदी के जलस्तर को मापते हैं। उन्होंने बताया कि बैराज 87 वर्ष पुराना हो गया है। शारदा बैराज से ही बनबसा और नेपाल के बीच वाहनों की आवाजाही की जाती है, जिसके लिए नियम से पांच बार गेट खोले जाते हैं। वर्ष 2013 की 17 जुलाई को नदी में अब तक का सर्वाधिक 5 लाख 48 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हुआ था, जबकि बैराज की जल घनत्व सहन क्षमता 6 लाख क्यूसेक है।
पानी उत्तराखंड का, लाभ यूपी को
वर्ष 1928 में अंग्रेज प्रशासकों ने बनबसा में शारदा बैराज का निर्माण कराया था। बैराज से निकाली गई शारदा नहर से यूपी के रायबरेली तक 22,08,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इस नहर से उत्तराखंड को सिंचाई का लाभ नहीं मिलता है।