चंपावत। जिले के दूरस्थ क्षेत्र बगेड़ी के ग्रामीणों ने सड़क सुविधा की मांग को लेकर जिला प्रशासन के बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई है । बगेड़ी गांव में सड़क सुविधा के न होने से यहां पलायन बढ़ रहा है। अब ग्रामीणों ने जल्द से जल्द सड़क सुविधा का लाभ न मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित बगेड़ी गांव में आज भी सड़क सुविधा के लिए लोग तरस रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के साथ-साथ पूर्व में जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया। लेकिन कहीं से भी सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया। ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद, प्रेम बल्लभ, सुरेश जोशी, पीतांबर जोशी, मोहन जोशी, नवीन जोशी, आनदेव जोशी, हीरा बल्लभ जोशी, शिव दत्त जोशी आदि ने सड़क सुविधा की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य मार्ग से छह किलोमीटर की दूरी पर इस गांव में 300 से अधिक मतदाता होने के बाद भी आज तक यह गांव सड़क सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों ने कहा कि जल्द ही सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा तो वह है आगामी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने के साथ आंदोलन करने को बाध्य होंगे। संवाद
सड़क बनने से 8 से 10 गांवों को मिलेगा लाभ
चंपावत। बगेड़ी के लिए सड़क बनने से यहां के आठ से दस गांव के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। छह किलोमीटर सड़क बनने से बगेड़ी, हैडिंगा, आमखेत, अमून, फोरकियाझाला सहित अन्य गांवों के लोगों को लाभ मिलेगा। संवाद
सड़क न होने से मरीजों के लिए डोली ही एकमात्र सहारा
चंपावत। बगेड़ी गांव में आज भी मरीजों के डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाया जाता है। इसमें अधिकांश मरीज की समय से इलाज न मिलने के कारण मौत हो जाती है। सड़क से छह किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव से मुख्य सड़क तक लाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता है। इससे अधिकांश मरीज समय से इलाज न मिलने पर दम तोड़ देते हैं। संवाद
कोट
गांव में सड़क के लिए काफी संघर्ष किया गया, लेकिन अभी तक गांव में सड़क नहीं पहुंच सकी है। आजादी से आज तक गांव में सड़क देखने के लिए आंखें तरस गई हैं। यहां निवास कर रहे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव वालों की आस जुड़ी हुई है। - लीलाधर जोशी, बुजुर्ग।
कोट
आज के दौर में भी गांव में सड़क नही होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीमार व्यक्ति के लिए डोली ही एक मात्र सहारा है। गर्भवती महिलाओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जिससे अधिकांश महिलाओं को सरकार के अन्य योजनाओं का लाभ भी नही मिल पाता है। - सुरेश जोशी, युवा ग्रामीण।