पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। कोरोना महामारी के बीच लगातार दूसरी बार रविवार को देवीधुरा के खोलीखांण दुबाचौड़ा मैदान में सांकेतिक रूप से बगवाल (फल-फूलों से होने वाला संग्राम) खेली गई गई। इस बार 7 मिनट 57 सेकेंड (करीब आठ मिनट) तक बगवाल खेली गई जो पिछले वर्ष से तीन मिनट अधिक है। शुरू में फलों से बगवाल खेलने के बाद पत्थर भी चले। वालिग खाम के मुखिया बद्री सिंह बिष्ट सहित कुल 77 बगवाली योद्धा और अन्य लोग चोटिल हुए। बगवाल खेलने वालों की संख्या प्रशासन से निर्धारित संख्या से काफी अधिक थी।
सुबह चार बजे से मां बाराही धाम मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हुई। मैदान में प्रवेश करने से पहले सभी चारों खामों (गहरवाल, चम्याल, लमगड़िया, वालिग) और सात थोकों के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही का जयकारा किया। मंदिर की परिक्रमा और पूजन के बाद बगवाल का आगाज हुआ। मां बाराही धाम मंदिर के पंडित कीर्तिबल्लभ शास्त्री की शंखध्वनि के साथ सुबह 11:02 बजे बगवाल का श्रीगणेश हुआ। चारों खामों के करीब 300 लोगों ने बगवाल में हिस्सा लिया। बगवाल देखने के लिए दर्शक दीर्घा में करीब 1250 लोग मौजूद थे।
सबसे पहले मोहन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में केसरिया साफा पहने गहरवाल खाम के रणबांकुरे ई-हा-हा के जयकारे के साथ मैदान में पहुंचे। फिर गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में गुलाबी साफा पहने चम्याल खाम के रणबांकुरों ने दस्तक दी। इसके बाद वीरेंद्र सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में पीले साफ के साथ लमगड़िया खाम ने मां बाराही की जयकारे के साथ मैदान में प्रवेश किया और आखिर में बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में सफेद साफा पहनकर वालिग खाम के वीरों ने माता के जयकारे के साथ प्रवेश किया। हर खाम के योद्धाओं ने फर्रे के साथ मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद चम्याल और गहरवाल खाम ने फल-फूल बरसा कर बगवाल का श्रीगणेश किया, जबकि मंदिर की ओर से लमगड़िया और वालिग खाम से चम्याल, गहरवाल खाम ने मोर्चा लिया।
बगवाल शुरू होने से पहले पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने मां बाराही देवी का पूजन किया। मंदिर कमेटी ने दावा किया है कि संख्या भले ही ज्यादा रही, लेकिन कोरोना के नियमों का पालन किया गया। पुजारी धर्मानंद ने 11:10 बजे चंवर झुलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत किया। बगवाल पर विराम लगने के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने कुशलक्षेम पूछने के साथ ही मां के सम्मुख शीश नवाया। एसडीएम अनिल गर्ब्याल, सीओ अशोक कुमार सिंह, तहसीलदार सचिन कुमार, निरीक्षक नारायण सिंह, एसओ हरीश प्रसाद आदि व्यवस्थाओं को बनाए रखने में जुटे रहे। इसके बावजूद हल्द्वानी और लोहाघाट वाले मार्गों पर कई बार जाम लगा।
ये रहे प्रमुख बगवाली वीर
लमगड़िया खाम के साथ मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, खीम सिंह लमगड़िया, आन सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह, वालिग खाम की ओर से मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट, राम सिंह कैडा, चम्याल खाम में लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल और गहरवाल खाम की ओर से जोध सिंह बिष्ट, डुंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि योद्धा थे। पूजा में चारों खामों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मां बाराही धाम देवीधुरा में बगवाल खेलते चारों खामों के योद्घा। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : CHAMPAWAT
दूसरे खामों के प्रहार से बचने के लिए फर्रों की ओट लेते बगवाली वीर। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : CHAMPAWAT