टनकपुर (चंपावत)। पुलिस की एसओजी और वन विभाग की टीम ने तेंदुए की तीन खालों के साथ अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। बरामद खालें 9 फुट 6 इंच तक लंबी हैं। पूछताछ में आरोपी ने गिरोह के बारे में पुलिस को कई अहम जानकारियां दी हैं।
डीआईजी और एसपी के निर्देश पर वन्यजीव अंग तस्करों की धरपकड़ को सक्रिय एसओजी को पता चला कि चंपावत के मंच तामली क्षेत्र में वन्यजीव अंगों का तस्कर गिरोह सक्रिय है। एसओजी ने वन विभाग से तालमेल बैठाकर तस्करों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
रविवार रात मुखबिर की सूचना पर एसओजी और चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज की टीम ने चल्थी के पास एक युवक के सामान की तलाशी ली तो उसके पास से तेंदुए की तीन खालें मिलीं। आरोपी नेपाल सीमा से लगे ग्राम सतकुली थाना मंच तामली चंपावत निवासी होशियार सिंह है।
एसओजी इंचार्ज सुरेंद्र सिंह खड़ायत ने बताया कि आरोपी के पास से बरामद खालों में तेंदुओं का बंदूक से शिकार करने के निशान हैं। पूछताछ में उसने बताया कि वह दो साल से वन्यजीव अंगों की तस्करी कर रहा है। इससे पहले भी वह वन्यजीवों के अंगों और तेंदुए की खालों को दिल्ली में बेच चुका है।
सोमवार को वह खालों को बेचने के लिए दिल्ली ले जा रहा था। आरोपी से अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। आरोपी ने बताया कि वह अपने पिता की लाइसेंसी दोनाली बंदूक से शिकार करता था। इधर, रेंजर बीके महरा ने बताया कि बरामद खालों में एक खाल 9 फुट 6 इंच लंबी है। दूसरी खाल 7 फुट 7 इंच और तीसरी खाल की लंबाई 7 फुट 3 इंच है।
खालों की लंबाई से अनुमान है कि मारे गए तेंदुओं की उम्र साढ़े तीन से पांच साल के बीच रही होगी। बरामद खालें करीब छह माह पुरानी होंगी। 26 वन अधिनियम के अलावा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 3, 49, 50, 51, 52 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
डीआईजी अजय रौतेला, एसपी रामचंद्र राजगुरु ने वन्यजीव तस्कर को पकड़ने वाली पुलिस टीम को 12500 का इनाम देने की घोषणा की है। पकड़ने वाली टीम में एसओजी इंचार्ज सुरेंद्र सिंह खड़ायत के अलावा कांस्टेबल भुवन पांडेय, नवलकिशोर, संजय दोसाद, दीपक प्रसाद, सद्दाम हुसैन के अलाव रेंजर बीके महरा, वनरक्षक रेवाधर जोशी, भरत सिंह नेगी, गिरीश चंद्र जोशी शामिल थे।
टनकपुर (चंपावत)। इस माह कुमाऊं में वन्यजीव अंगों की तस्करी के पकड़े गए दो ताजे बड़ेे मामलों में नाम आने से चंपावत जिला वन्यजीव अंगों की तस्करी में संवेदनशील माना जाने लगा है। चंपावत जिले की 90 किमी सीमा पड़ोसी देश नेपाल से लगी है।
दोनों देशों के बीच खुली सीमा होने के कारण तस्कर गिरोह इस सीमा को वन्यजीव अंगों की तस्करी के लिए सुरक्षित मानते हैं। यहीं वजह है कि नेपाल से लगे सीमांत क्षेत्रों में वन्यजीव अंगों की तस्करी के मामले उजागर होते रहते हैं। इस माह कुमाऊं क्षेत्र में तेंदुओं की खालों की तस्करी के दो बड़े मामले उजागर हुए हैं और दोनों ही मामलों में चंपावत जिले का नाम आया है।
पहला मामला आठ फरवरी को सामने आया। इसमें एसओटीएफ टीम ने गोला पुल हल्द्वानी के पास मूलाकोट चंपावत निवासी कल्याण सिंह, पाटी निवासी चिंता सिंह को तेंदुए की तीन खालों के पकड़ा था। सोमवार को भी एसओजी टीम ने चंपावत जिले के ही मंच तामली निवासी होशियार सिंह को तेंदुए की तीन खालों के साथ पकड़ कर वन्यजीव अंगों की तस्करी का भंडाफोड़ किया है। दोनों मामलों में चंपावत का नाम जुड़ने से लगता है कि नेपाल सीमा से लगा यह जिला अब न सिर्फ वन्यजीवों का शिकार, अंगों की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बल्कि वन्यजीव तस्करों का भी गढ़ बन गया है।