चंपावत। जिला मुख्यालय के छीड़ापानी स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र में 3.60 करोड़ रुपये से एक्वाकल्चर प्लांट लगाया जाएगा। अनुसंधान केंद्र में एक्वाकल्चर प्लांट के माध्यम से ठंडे पानी को रिसाइकिल कर फिर से प्रयोग में लाया जाएगा। प्लांट लगने से अनुसंधान केंद्र की जरूरतों के साथ ही रेनबो ट्राउट प्रजाति के मछली के अंडों के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. कुणाल किशोर के अनुसार केंद्र में राज्य का पहला रि रेस्कूलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरआरएएस) लगाया जाना है। इसके लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्लांट के माध्यम से ठंडे पानी को रिसाइकिल कर फिर से केंद्र के अनुसंधान कार्यो के लिए प्रयोग में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ समय से केंद्र में पानी की कमी होने से ठंडे पानी में रहने वाली रेनेबो ट्राउट प्रजाति की मछलियों के पालन पोषण में दिक्कतें आ रही थीं। अब एक्वाकल्चर प्लांट लगने से पानी की कमी को पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्लांट के लगने से पानी का तापमान स्थिर रहेगा और ठंडे पानी में रहने वाली ट्राउट मछलियों को लगातार साफ, ठंडा और बहता हुआ पानी मिलेगा।
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केंद्र में प्रतिदिन होती है डेढ़ लाख लीटर ठंडे पानी की जरूरत
चंपावत। छीड़ापानी स्थित शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र में मछलियों के लिए प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर ठंडे पानी की जरूरत होती है। लेकिन बीते कुछ दिनों से पानी की आपूर्ति में कुछ कमी आई है। इसको दूर करने के लिए अनुसंधान केंद्र में एक्वाकल्चर सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे ट्राउट प्रजाति की मछलियों के अंडों का अधिक उत्पादन हो सकेगा। संवाद
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प्लांट से हर आठ घंटे में बदलता रहेगा पानी
चंपावत। छीड़ापानी में रि रेस्कूलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम का प्लांट से हर आठ घंटे में पानी बदलता रहेगा। अनुसंधान केंद्र के प्रभारी के अनुसार केंद्र में पहले से बनाए गए 50 लाख लीटर क्षमता के टैंक से प्लांट में पानी सप्लाई किया जाएगा। जो हर आठ घंटे में रिसाइकिल होता रहेगा। संवाद