चंपावत/टनकपुर। सेना के तीनों अंगों में नौजवानों की भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना से युवा भड़क गए हैं। फौज की भर्ती की तैयारी कर रहे नौजवानों ने लाठी-डंडों के साथ बृहस्पतिवार को तीन घंटे तक यहां जोरदार प्रदर्शन किया। चंपावत शहर की तमाम सड़कों में जुलूस निकालने के बाद एसडीएम के माध्यम से रक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा गया। मोदी सरकार के टूर ऑफ ड्यूटी (टीओडी) फैसले के विरोध में जबर्दस्त नारेबाजी के बीच निकाले गए जुलूस के दौरान रास्ते में लगे भाजपा के होर्डिंग, पोस्टर, झंडों को उतार आग के हवाले किया। पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल के नेतृत्व में कांग्रेस ने आंदोलन का समर्थन किया है। इंसाफ के मंदिर गोल्ज्यू दरबार में केंद्र सरकार की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की। युवाओं ने पिछले साल शुरू भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा न कराने और अग्निपथ योजना को निरस्त न करने पर 20 जून को आंदोलन की चेतावनी दी है।
फौज की भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने अग्निपथ योजना को नौजवानों के हितों पर कुठाराघात बताया। युवाओं ने फरवरी 2021 में चिकित्सा और शारीरिक परीक्षा पास करने के बाद लिखित परीक्षा न करने पर नाराजगी जताई। विरोध प्रदर्शन करने वालों में बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा शामिल थे। वहीं टनकपुर में भी प्रदर्शन हुआ। तहसीलदार पिंकी आर्या के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। विरोध प्रदर्शन में राजेंद्र प्रसाद, शंकर महर, बादल सिंह महर, हिमालय सिंह, प्रकाश महर, योगेश महर, मनोज राम, गौरव भट्ट, अमन मौर्य, रामेन सिंह, करन, राहुल, चंदन सिंह, दीपक कुंवर आदि थे।
लिखित परीक्षा के इंतजार में बीत गए सवा साल
चंपावत। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के 1440 युवाओं का भविष्य मंझधार में है। फरवरी 2021 में इन नौजवानों ने मेडिकल फिटनेस और शारीरिक परीक्षा पास की थी। फौज की तैयारी कर रहे मनीष महर का कहना है कि इसके बाद से सवा साल बीत गया, लेकिन लिखित परीक्षा न होने से इतने युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। और अब केंद्र सरकार द्वारा सेना के तीनों अंगों में सिपाही की भर्ती के लिए 14 जून को प्रस्तुत अग्निपथ योजना प्रस्तुत की गई। युवाओं का कहना है कि इससे पिछले साल हुई भर्ती परीक्षा पर भी तलवार लटक गई है। इस परीक्षा को निरस्त करने के अंदेशे से युवा अपने भविष्य के प्रति आशंकित हैं। इन युवाओं ने पिछले साल भर्ती परीक्षा में मेडिकल फिटनेस और शारीरिक परीक्षा पास करने वाले युवाओं की परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए जल्द से जल्द भर्ती शुरू करने का आग्रह किया है।
फरवरी 2021 में फौज की भर्ती के लिए हुई शारीरिक परीक्षा और मेडिकल फिटनेस को पास करने वाले युवा इस परीक्षा को निरस्त करने के बजाय जल्द से जल्द लिखित परीक्षा चाहते हैं। इनमें से कई ऐसे हैं, जो ओवरएज होने से अब फौज की भर्ती के लायक ही नहीं रह गए हैं।
परीक्षा निरस्त हुई तो कभी फौजी नहीं बन सकेंगे धीरज
लोहाघाट के धीरज सिंह के लिए फरवरी 2021 में आखिरी मौका था। उन्होंने इस अवसर का उपयोग करते हुए शुरुआती दोनों बाधाएं पार की। और करीब सवा साल से लिखित परीक्षा की राह देख रहे हैं। धीरज कहते हैं कि पिछली परीक्षा उनके लिए अंतिम मौका था। अब उनकी उम्र 21 पार हो गई है। ऐसे में अगर पिछले साल शुरू हुई फौज की भर्ती प्रक्रिया खारिज हुई, तो उनका फौजी बनने का सपना पूरा नहीं हो सकेगा।
किराये में रह तैयारी कर रहे धामीसौन के मनोज
चंपावत। धामीसौन गांव का युवा मनोज जोशी 17 किमी दूर चंपावत में किराये के मकान में रह फौज की तैयारी कर रहा है। फौज की तैयारी के लिए हर माह छह हजार रुपये खर्च कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने भी दो बाधाएं पार कीं लेकिन लिखित परीक्षा को लेकर असमंजस बना हुआ है।
ख्वाब के चकनाचूर होने का अंदेशा
चंपावत। पिछले साल की परीक्षा निरस्त हुई, तो चंपावत के आलीचौड़ गांव के अमित कुमार का ख्वाब चकनाचूर हो जाएगा। कहते हैं कि इस परीक्षा के लिए रोज चार घंटे का कड़ा अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन अगर भर्ती पहले की तरह नहीं हुई, तो भविष्य मंझधार में लग रहा है।
अग्निपथ योजना की कोई उपयोगिता नहीं
चंपावत। नवीन कापड़ी को भी फौज की लिखित परीक्षा का इंतजार है, लेकिन अब वे उहापोह में हैं। परीक्षा होगी या खारिज होगी? अग्निपथ योजना के बाद इसे लेकर परेशान है। पहाड़ के ज्यादातर युवा फौजी परिवारों से आते हैं। ऐसे में चार साल की इस योजना की युवाओं के लिए कोई उपयोगिता नहीं होगी। इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
चार साल बाद सुरक्षा गार्ड ही विकल्प
चंपावत। लिखित परीक्षा का इंतजार कर रहे बृजेश महराना कहते हैं कि चार साल में फौज में क्या सीखेंगे और फिर फौज की चार साल की सेवा के बाद सुरक्षा गार्ड में भर्ती होना भविष्य संवारना है? ऐसे में आज के युवा के लिए 25 साल बाद दिशाहीन होने का खतरा बढ़ जाएगा।
अग्निपथ योजना वापस ले सरकार : रैंसवाल
चंपावत। असम राइफल्स से सेवानिवृत्त नायब सूबेदार और शहीद राहुल रैंसवाल के पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल का कहना है कि अग्निपथ भर्ती योजना के लागू होने से युवाओं के भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा। देश हित में केंद्र सरकार को इस भर्ती योजना को वापस लेना चाहिए।
अग्निपथ योजना से मंझधार में युवा
चंपावत। कमल चंद कहते हैं कि अग्निपथ भर्ती योजना से युवाओं के भविष्य पर ग्रहण लग जाएगा। उन्हें पेंशन न मिले, कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सिर्फ चार साल की भर्ती का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में युवा मंझधार में फंस जाएंगे।
एक फौज बेरोजगारों की भी... चंपावत जिले में 13 साल में दोगुने हो गए खाली हाथ
चंपावत। देश की सीमा की हिफाजत करने वाली फौज की तरह ही चंपावत जिले में बेरोजगारों की भी फौज बनती जा रही है। जो एक अदद काम की तलाश में कई जगह भटक रही है। बेरोजगारी का ग्राफ भी दिन दुनी रात चौगुनी गति से बढ़ा है। वहीं इसके उल्ट रोजगार की चाल कछुए को भी मात देने वाली है। चंपावत जिले में 13 साल में बेरोजगारी तकरीबन दोगुनी हो गई है। 2009 में 12771 बेरोजगार थे, जो इस साल मार्च तक बढ़कर 24427 हो गए हैं। जबकि इस अवधि में महज 2715 युवाओं को काम मिला है।
हर चुनाव में पढ़ाई, दवाई, कमाई की चर्चा जरूर होती है, लेकिन इसे जमीन में उतारने में कोई भी सरकार बहुत उत्साहित नजर नहीं आती है। जिला सेवायोजन अधिकारी राजेश दुर्गापाल ने बताया कि इस साल मार्च तक जिले में 24427 (8963 महिला और 15464 पुरुष) पंजीकृत बेरोजगार हैं। युवाओं के लिए सरकारी नौकरी तो दूर, निजी क्षेत्र में भी काम के अवसर कम हो रहे हैं। जिले में 2021 में रोजगार मेले के जरिये 109 लोगों को रोजगार मिला। इसमें से 90 प्रतिशत युवाओं को निजी क्षेत्र में प्रशिक्षण के साथ काम दिया गया।
दस साल में चंपावत जिले की बेरोजगारी का हाल
वर्ष पुरुष महिलाएं कुल बेरोजगार
2009 9494 3277 12771
2019 14346 8833 23179
2022 15464 8963 24427
अग्निपथ योजना के विरोध में चंपावत में हुए प्रदर्शन के दौरान भाजपा के झंडे, पोस्टर और बैनरों को जल?- फोटो : CHAMPAWAT